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झारखंड हाईकोर्ट की सरकार पर सख्ती, जवाब दाखिल नहीं करने पर 8 हजार रुपये का जुर्माना लगाया

झारखंड हाईकोर्ट की सरकार पर सख्ती, जवाब दाखिल नहीं करने पर 8 हजार रुपये का जुर्माना लगाया

झारखंड हाईकोर्ट ने राज्य सरकार के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए उस पर 8 हजार रुपये का हर्जाना लगाया है। यह कार्रवाई प्रवर्तन निदेशालय (ED) के अधिकारियों के खिलाफ एससी-एसटी एक्ट के तहत दर्ज प्राथमिकी को रद्द करने से जुड़े मामले में जवाब दाखिल नहीं किए जाने पर की गई है। सोमवार को सुनवाई के दौरान अदालत ने सरकार की ओर से जवाब नहीं दिए जाने पर नाराजगी जताई और जुर्माना लगाने का आदेश दिया।

मामला ईडी अधिकारियों के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी से जुड़ा है। इस प्राथमिकी को रद्द करने की मांग को लेकर हाईकोर्ट में मामला पहुंचा था। सुनवाई के दौरान राज्य सरकार को अपना पक्ष रखते हुए जवाब दाखिल करना था, लेकिन निर्धारित समय तक जवाब दाखिल नहीं किया गया। इसके बाद अदालत ने सरकार पर आर्थिक दंड लगाया।

जवाब दाखिल नहीं करने पर अदालत ने जताई नाराजगी

हाईकोर्ट में मामले की सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से जवाब दाखिल नहीं किए जाने का मुद्दा उठा। अदालत ने इस पर सख्ती दिखाते हुए सरकार पर 8 हजार रुपये का हर्जाना लगाया।

अदालत की ओर से की गई इस कार्रवाई को न्यायिक प्रक्रिया में समय पर जवाब दाखिल करने की जिम्मेदारी से जोड़कर देखा जा रहा है। किसी मामले में संबंधित पक्ष को अपना पक्ष रखने के लिए समय दिया जाता है, लेकिन तय समय पर जवाब नहीं मिलने से सुनवाई की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है।

ED अधिकारियों के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी का मामला

यह पूरा मामला ईडी अधिकारियों के खिलाफ एससी-एसटी एक्ट के तहत दर्ज प्राथमिकी को रद्द करने की मांग से संबंधित है। इस मामले में हाईकोर्ट के सामने यह सवाल है कि संबंधित प्राथमिकी को निरस्त किया जाना चाहिए या नहीं।

हालांकि, उपलब्ध जानकारी में प्राथमिकी दर्ज होने की वजह, संबंधित अधिकारियों के नाम और मामले की पूरी पृष्ठभूमि का विवरण नहीं दिया गया है। इसलिए इस मामले के अन्य पहलुओं पर अभी विस्तृत जानकारी सामने आना बाकी है।

आगे की सुनवाई पर नजर

राज्य सरकार पर 8 हजार रुपये का हर्जाना लगाए जाने के बाद अब मामले में आगे की न्यायिक प्रक्रिया महत्वपूर्ण होगी। सरकार की ओर से जवाब दाखिल किए जाने और दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट प्राथमिकी रद्द करने की मांग पर विचार करेगा।

फिलहाल अदालत ने जवाब दाखिल नहीं किए जाने पर सरकार को आर्थिक दंड दिया है। प्राथमिकी रद्द करने को लेकर अंतिम निर्णय अभी सामने नहीं आया है।

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