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झारखंड के मुख्यमंत्री को हाई कोर्ट से झटका, जमीन खरीद मामले में खारिज कर दी सोरेन की याचिका
 

झारखंड के मुख्यमंत्री को हाई कोर्ट से झटका, जमीन खरीद मामले में खारिज कर दी सोरेन की याचिका

झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को रांची के जमीन खरीद मामले में झारखंड हाईकोर्ट से राहत नहीं मिली है। हाईकोर्ट ने शुक्रवार को उनकी उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने रांची की विशेष पीएमएलए अदालत में अपने खिलाफ चल रही आपराधिक कार्यवाही पर रोक लगाने की मांग की थी। अदालत के इस फैसले के बाद मामले में निचली अदालत की कार्यवाही आगे बढ़ने का रास्ता साफ हो गया है।

यह मामला रांची के बरगेन या बड़गाईं इलाके की 8.86 एकड़ जमीन से जुड़ा है। प्रवर्तन निदेशालय यानी ईडी इस मामले में कथित अवैध तरीके से जमीन के अधिग्रहण और हस्तांतरण से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों की जांच कर रहा है। हेमंत सोरेन ने इन आरोपों से इनकार किया है।

मुख्यमंत्री ने झारखंड हाईकोर्ट का रुख तब किया था, जब रांची की विशेष पीएमएलए अदालत ने 8 जून को उनकी डिस्चार्ज याचिका खारिज कर दी थी। डिस्चार्ज याचिका के जरिए उन्होंने मामले में उनके खिलाफ आगे की आपराधिक कार्यवाही से राहत मांगी थी। इसके बाद उन्होंने हाईकोर्ट में निचली अदालत की कार्यवाही पर रोक लगाने की मांग की।

हाईकोर्ट में इस मामले पर दोनों पक्षों की दलीलें सुनी गईं। 16 सितंबर को अदालत ने सुनवाई पूरी करने के बाद अपना आदेश सुरक्षित रख लिया था। शुक्रवार को अदालत ने याचिका खारिज करने का फैसला सुनाया। इससे अब विशेष पीएमएलए अदालत में मामले की आगे की प्रक्रिया जारी रह सकेगी।

ईडी की ओर से मामले में जमीन से जुड़े दस्तावेजों, लेनदेन और अन्य साक्ष्यों के आधार पर आरोप लगाए गए हैं। एजेंसी का दावा है कि जांच के दौरान उसे ऐसे तथ्य मिले हैं, जिनके आधार पर मामले में आगे कार्रवाई की जा सकती है। वहीं, सोरेन की ओर से इन आरोपों को चुनौती दी गई है और उनके खिलाफ पर्याप्त आधार होने पर सवाल उठाए गए हैं।

इस मामले में विशेष पीएमएलए अदालत पहले ही अन्य आरोपियों के खिलाफ आरोप तय कर चुकी है। रिपोर्टों के मुताबिक अंतू तिर्की, आर्किटेक्ट विनोद कुमार सिंह समेत 15 अन्य आरोपियों के खिलाफ आरोप तय किए जा चुके हैं। अब हाईकोर्ट से हेमंत सोरेन को राहत नहीं मिलने के बाद उनके मामले में भी आगे की न्यायिक प्रक्रिया बढ़ सकती है।

गौरतलब है कि हाईकोर्ट में सोरेन की एक आपराधिक याचिका पर अगली सुनवाई 14 अक्टूबर को सूचीबद्ध है। वहीं, विशेष पीएमएलए अदालत में मामले की कार्यवाही भी आगे बढ़नी है। हाईकोर्ट का ताजा आदेश केवल कार्यवाही पर रोक की मांग से संबंधित है और इससे मामले में आरोपों की अंतिम सत्यता या दोषसिद्धि तय नहीं होती।

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