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रांची में सब्जी बेचते दिखे अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी अमरदीप, पीछे टंगे थे देश के लिए जीते मेडल; वायरल वीडियो ने खड़े किए सवाल

रांची में सब्जी बेचते दिखे अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी अमरदीप, पीछे टंगे थे देश के लिए जीते मेडल; वायरल वीडियो ने खड़े किए सवाल

रांची के अरगोड़ा चौक से सामने आया एक वीडियो इन दिनों सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में एक युवक सड़क किनारे सब्जी तौलकर ग्राहकों को देता नजर आ रहा है। पहली नजर में यह आम दुकानदार जैसा दृश्य लगता है, लेकिन कैमरा जैसे ही उसके पीछे की दीवार की ओर जाता है, तस्वीर पूरी तरह बदल जाती है। दीवार पर देश के लिए जीते गए कई मेडल टंगे दिखाई देते हैं। सब्जी बेच रहे इस शख्स का नाम अमरदीप कुमार है, जो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं।

अमरदीप की कहानी उन खिलाड़ियों के संघर्ष को सामने लाती है, जो खेल के मैदान में देश का नाम रोशन करने के बावजूद आर्थिक परेशानियों से जूझने को मजबूर हैं। कभी देश के लिए पदक जीतने वाले अमरदीप आज परिवार की जरूरतें पूरी करने के लिए सब्जी की दुकान चला रहे हैं। वायरल वीडियो में एक तरफ उनके हाथ में तराजू नजर आता है तो दूसरी तरफ दीवार पर सजे मेडल उनकी खेल उपलब्धियों की गवाही देते हैं।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कर चुके हैं भारत का प्रतिनिधित्व

अमरदीप कुमार कोई सामान्य सब्जी विक्रेता नहीं हैं। वह थ्रोबॉल के खिलाड़ी रहे हैं और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। खेल के दौरान उन्होंने देश के लिए स्वर्ण पदक भी जीता है। उनके पीछे दिखाई दे रहे मेडल इस बात का प्रमाण हैं कि उन्होंने अपने खेल करियर में कई उपलब्धियां हासिल की हैं।लेकिन वक्त और परिस्थितियों ने उनकी जिंदगी की दिशा बदल दी। परिवार की आर्थिक जरूरतों को पूरा करने के लिए उन्हें खेल के मैदान से निकलकर रोजमर्रा की कमाई के लिए सब्जी बेचने का काम करना पड़ रहा है।

मेडल दीवार पर, हाथ में तराजू

वायरल वीडियो की सबसे भावुक तस्वीर यही है कि जिस खिलाड़ी ने कभी देश के लिए मेडल जीते, उसके पीछे वही मेडल दीवार पर टंगे हैं और सामने वह ग्राहकों को सब्जी तौल रहा है। यह दृश्य सिर्फ अमरदीप के व्यक्तिगत संघर्ष को नहीं दिखाता, बल्कि खेल और खिलाड़ियों के भविष्य को लेकर भी कई सवाल खड़े करता है।सोशल मीडिया पर वीडियो सामने आने के बाद लोग यह सवाल उठा रहे हैं कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का प्रतिनिधित्व करने और पदक जीतने वाले खिलाड़ियों को क्या पर्याप्त आर्थिक और सामाजिक सुरक्षा मिल पाती है। कई लोगों का मानना है कि खिलाड़ियों को सिर्फ उनके खेल करियर के दौरान ही नहीं, बल्कि उसके बाद भी सम्मानजनक जीवन के लिए जरूरी सहयोग मिलना चाहिए।

हौसला आज भी बरकरार

हालांकि परिस्थितियों ने अमरदीप के हाथ में तराजू जरूर थमा दिया है, लेकिन उनके भीतर का खिलाड़ी आज भी जिंदा है। आर्थिक मजबूरियों के बावजूद उन्होंने मेहनत करना नहीं छोड़ा। सब्जी बेचकर परिवार की जिम्मेदारियां निभाना उनके संघर्ष और आत्मसम्मान को दिखाता है।अमरदीप की कहानी यह याद दिलाती है कि किसी खिलाड़ी की असली उपलब्धि सिर्फ उसके मेडल तक सीमित नहीं होती। मैदान में तिरंगा ऊंचा करने वाले खिलाड़ियों के संघर्ष को समझना और उनके भविष्य को सुरक्षित बनाना भी समाज और व्यवस्था की जिम्मेदारी है। रांची की सड़क पर सब्जी तौलते अमरदीप और उनके पीछे टंगे मेडल आज इसी सवाल को सामने ला रहे हैं।

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