Jharkhand में 18 साल से कम उम्र में ब्याह दी जा रहीं हर दस में से तीन लड़कियां !
सबसे चिंताजनक स्थिति लिंगानुपात के मामले में है। एनएफएचएस-4 के 2015-16के आंकड़ों के अनुसार झारखंड में प्रति 1000 पुरुषों पर 919 लड़कियां थीं। एनएफएचएस-2 यानी 2020-21 में यह आंकड़ा 899 हो गया है। यानी बेटी बचाओ अभियान के बावजूद झारखंड में लिंगानुपात में गिरावट आयी है। देश की बात करें तो लिंगानुपात में सुधार दर्ज किया गया है। अभी देश में यह अनुपात 1000 पुरुषों पर 929 महिलाएं हैं। झारखंड के अलावा बिहार, चंडीगढ़, छत्तीसगढ़, गोवा जैसे राज्यों में भी लिंगानुपात में गिरावट दर्ज की गयी है। हालांकि झारखंड सरकार के स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार राज्य में चाइल्ड सेक्स रेशियो 948 है। झारखंड में लिंगानुपात, भ्रूण हत्या, स्त्री-पुरुष असमानता जैसे विषयों पर शोध करने वाले सुधीर पाल कहते हैं कि राज्य के जनजातीय बहुल इलाकों में लिंगानुपात बेहतर है। जनजातीय समाज में शिक्षा का स्तर भले बहुत बेहतर नहीं है, लेकिन वहां भेदभाव नहीं के बराबर है।
--आईएएनएस
रांची न्यूज डेस्क !!!
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