Hemant Soren Case: हाईकोर्ट में सुनवाई टालने की मांग, कोर्ट ने पिछली बार मांगे गए समय का भी किया जिक्र
झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से जुड़े जमीन मामले में झारखंड हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान उनके वकील ने अतिरिक्त समय की मांग की। बचाव पक्ष की ओर से सुनवाई टालने का अनुरोध किया गया। इस पर अदालत ने गौर किया कि मामले में इससे पहले भी समय बढ़ाने और सुनवाई स्थगित करने की मांग की जा चुकी है। मामला रांची के बरगाईं इलाके की 8.86 एकड़ जमीन से जुड़े कथित मनी लॉन्ड्रिंग प्रकरण से संबंधित है। हेमंत सोरेन ने विशेष PMLA अदालत की कार्यवाही को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट का रुख किया है। उनकी याचिका में निचली अदालत में आरोप तय करने की प्रक्रिया पर रोक लगाने की मांग भी की गई थी। हालांकि, हाईकोर्ट ने फिलहाल विशेष अदालत की कार्यवाही पर रोक लगाने से इनकार किया है।
दस्तावेजों की जांच के लिए पहले भी मांगा गया था समय
इस मामले में बचाव पक्ष पहले भी प्रवर्तन निदेशालय यानी ED की ओर से उपलब्ध कराए गए दस्तावेजों की जांच के लिए समय मांग चुका है। 24 सितंबर की सुनवाई के दौरान सोरेन के वकील ने दस्तावेजों को देखने और उनकी जांच के लिए अतिरिक्त समय मांगा था। इसके बाद विशेष PMLA अदालत ने आरोप तय करने की कार्यवाही को 30 सितंबर तक टाल दिया था।
इसके बाद 30 सितंबर को रांची की विशेष PMLA अदालत ने हेमंत सोरेन के खिलाफ आरोप तय कर दिए। सोरेन वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए अदालत में पेश हुए और उन्होंने अपने ऊपर लगे आरोपों से इनकार किया। इस मामले में वह 17वें आरोपी हैं। इससे पहले 16 अन्य आरोपियों के खिलाफ आरोप तय किए जा चुके हैं।
हाईकोर्ट में जारी है कानूनी लड़ाई
हेमंत सोरेन की ओर से हाईकोर्ट में दाखिल याचिका में विशेष अदालत की कार्यवाही और आरोप तय करने की प्रक्रिया को चुनौती दी गई है। हाईकोर्ट ने मामले में ED से जवाब मांगा है। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, अदालत ने ED को अतिरिक्त हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है और आगे की सुनवाई अक्टूबर में निर्धारित है।
वहीं, विशेष PMLA अदालत में आरोप तय होने के बाद मामला अब ट्रायल की दिशा में आगे बढ़ चुका है। अगली सुनवाई 30 नवंबर के लिए निर्धारित की गई है। इस दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से मामले से जुड़े साक्ष्य और गवाह पेश किए जाने की प्रक्रिया आगे बढ़ सकती है। हेमंत सोरेन और उनके वकीलों की ओर से मामले में आरोपों को गलत बताया गया है। अब हाईकोर्ट में लंबित याचिका और विशेष PMLA अदालत में चलने वाली ट्रायल प्रक्रिया, दोनों पर आगे की कानूनी कार्रवाई महत्वपूर्ण रहेगी।

