JPSC ACF और FRO परीक्षा में धांधली का बड़ा खुलासा, करीब 100 अभ्यर्थियों से पैसे लेकर पास कराने की सेटिंग का आरोप
झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की सहायक वन संरक्षक (ACF) और फॉरेस्ट रेंज ऑफिसर (FRO) परीक्षा को लेकर धांधली और पैसे के खेल का बड़ा मामला सामने आया है। सीआईडी की जांच में कथित तौर पर खुलासा हुआ है कि दोनों परीक्षाओं में करीब 100 अभ्यर्थियों से पैसे लेकर उन्हें परीक्षा में पास कराने की सेटिंग की गई थी। जांच में सामने आए इस खुलासे के बाद भर्ती परीक्षाओं की पारदर्शिता को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
करीब 100 अभ्यर्थियों से पैसे लेने का आरोप
सीआईडी की जांच के अनुसार, कथित तौर पर एक संगठित तरीके से अभ्यर्थियों से संपर्क किया गया और उन्हें परीक्षा में सफलता दिलाने का भरोसा दिया गया। आरोप है कि इसके बदले अभ्यर्थियों से पैसे लिए गए।जांच में यह बात सामने आने का दावा किया गया है कि इस पूरे खेल में करीब 100 अभ्यर्थी शामिल थे। हालांकि, प्रत्येक अभ्यर्थी से कितनी रकम ली गई और कुल कितने पैसे का लेनदेन हुआ, इसकी पूरी तस्वीर जांच आगे बढ़ने के बाद स्पष्ट होगी।
प्रारंभिक और मुख्य परीक्षा में पास कराने की सेटिंग
मामले की गंभीरता इसलिए भी बढ़ जाती है क्योंकि कथित धांधली केवल एक चरण तक सीमित नहीं थी। सीआईडी जांच में आरोप है कि अभ्यर्थियों को प्रारंभिक परीक्षा और मुख्य परीक्षा दोनों में पास कराने की सेटिंग की गई थी।अगर जांच में ये आरोप सही साबित होते हैं तो यह भर्ती प्रक्रिया की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़ा करेगा। परीक्षा में सफल होने वाले अभ्यर्थियों के चयन और उनसे जुड़े रिकॉर्ड की भी जांच महत्वपूर्ण हो सकती है।
सीआईडी खंगाल रही पूरे नेटवर्क की कड़ी
मामले की जांच के दौरान सीआईडी कथित तौर पर इस पूरे नेटवर्क से जुड़े लोगों की भूमिका का पता लगाने में जुटी है। जांच का फोकस यह पता लगाने पर भी हो सकता है कि अभ्यर्थियों से संपर्क कौन करता था, पैसे का लेनदेन किस माध्यम से हुआ और परीक्षा प्रक्रिया से जुड़े लोगों की इसमें कोई भूमिका थी या नहीं।जांच एजेंसी उन लोगों तक पहुंचने की कोशिश कर रही है, जिन्होंने कथित तौर पर अभ्यर्थियों को परीक्षा में पास कराने का भरोसा दिया था।
भर्ती परीक्षा की पारदर्शिता पर उठे सवाल
JPSC जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं में हजारों अभ्यर्थी कड़ी मेहनत के बाद शामिल होते हैं। ऐसे में पैसे के बदले परीक्षा में सफलता दिलाने की कथित कोशिश सामने आने से पूरी चयन प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर सवाल उठना स्वाभाविक है।फिलहाल सीआईडी की जांच में सामने आए आरोपों के आधार पर मामले की आगे की कड़ियां जोड़ी जा रही हैं। करीब 100 अभ्यर्थियों से कथित लेनदेन और परीक्षा के दोनों चरणों में पास कराने की सेटिंग का पूरा नेटवर्क कितना बड़ा था, यह जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।

