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रिम्स की जमीन घोटाले में बड़ा खुलासा: आदिवासी महिला को बनाया मोहरा, ACB जांच में सामने आई साजिश

रिम्स की जमीन घोटाले में बड़ा खुलासा: आदिवासी महिला को बनाया मोहरा, ACB जांच में सामने आई साजिश

भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) की जांच में रिम्स की जमीन से जुड़े मामले में बड़ा खुलासा हुआ है। जांच एजेंसी के अनुसार रिम्स की करीब 60 डिसमिल जमीन को कथित तौर पर जमीन माफियाओं ने साजिश के तहत एक आदिवासी और अनपढ़ महिला को मोहरा बनाकर बेच दिया।

जांच में सामने आया है कि यह पूरा मामला साल 2015 के दौरान शुरू हुआ, जब जमीन से जुड़े दस्तावेजों को ऑनलाइन करने की प्रक्रिया चल रही थी। इसी दौरान कथित तौर पर फर्जीवाड़ा और हेरफेर कर जमीन पर कब्जा जमाने की कोशिश की गई।

एसीबी अधिकारियों के मुताबिक, जमीन माफियाओं ने महिला की अशिक्षा और कमजोर सामाजिक स्थिति का फायदा उठाया। आरोप है कि महिला के नाम का इस्तेमाल कर दस्तावेज तैयार किए गए और जमीन की खरीद-बिक्री से जुड़ी प्रक्रिया को अंजाम दिया गया।

जांच एजेंसी अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस पूरे मामले में किन-किन लोगों की भूमिका रही और सरकारी स्तर पर किसकी मिलीभगत से दस्तावेजों में बदलाव संभव हो पाया। शुरुआती जांच में कुछ अधिकारियों और बिचौलियों की भूमिका भी संदेह के घेरे में बताई जा रही है।

सूत्रों के अनुसार जमीन की ऑनलाइन प्रक्रिया के दौरान रिकॉर्ड में बदलाव और दस्तावेजों की एंट्री को लेकर कई अनियमितताएं सामने आई हैं। एसीबी अब संबंधित दस्तावेजों, रजिस्ट्रेशन रिकॉर्ड और डिजिटल एंट्री की बारीकी से जांच कर रही है।

यह मामला सामने आने के बाद प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मच गया है। वहीं स्थानीय लोगों का कहना है कि सरकारी जमीनों पर कब्जा और फर्जीवाड़े के मामले लगातार बढ़ रहे हैं, जिन पर सख्त कार्रवाई की जरूरत है।

कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं, तो इसमें धोखाधड़ी, फर्जी दस्तावेज तैयार करने, सरकारी संपत्ति के दुरुपयोग और आपराधिक साजिश जैसी गंभीर धाराएं लग सकती हैं।

फिलहाल एसीबी पूरे मामले की गहन जांच कर रही है और जल्द ही इससे जुड़े अन्य लोगों पर भी कार्रवाई हो सकती है। जांच एजेंसी का कहना है कि दोषियों को किसी भी हालत में बख्शा नहीं जाएगा।

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