JPSC पेपर लीक मामले में बड़ा खुलासा, सेटिंग के बाद OMR शीट में होती थी छेड़छाड़
झारखंड में JPSC और JSSC-CGL परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं की जांच कर रही CID के सामने परीक्षा में धांधली को लेकर कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। जांच में सामने आया है कि अभ्यर्थियों से संपर्क करने और पूरी सेटिंग तैयार करने के लिए एजेंटों की मदद ली जाती थी। इसके बाद चयन में मदद पहुंचाने के लिए OMR शीट और परीक्षा के मूल्यांकन से जुड़े सिस्टम में कथित तौर पर हेरफेर किया जाता था। CID इन बयानों और आरोपों का सत्यापन कर रही है।
एजेंटों के जरिए अभ्यर्थियों से संपर्क
जांच सामग्री के मुताबिक, श्वेता गुप्ता और अभय तिवारी के कहने पर एजेंट संभावित अभ्यर्थियों से संपर्क करते थे। अभ्यर्थियों से बातचीत के बाद चयन की कथित डील तय की जाती थी। इसके बाद संबंधित अभ्यर्थियों के रोल नंबर और अन्य जरूरी जानकारी उन लोगों तक पहुंचाई जाती थी, जो परीक्षा प्रक्रिया में कथित तौर पर हेरफेर कर सकते थे।
CID के सामने दर्ज बयानों में यह भी दावा किया गया है कि कुछ अभ्यर्थियों के रोल नंबर पहले से उपलब्ध कराए जाते थे। इसके बाद OMR शीट में छोड़े गए सवालों के जवाब बाद में सही विकल्प के रूप में भरे जाने की बात सामने आई है।
खाली छोड़े जवाब बाद में किए जाते थे सही
जांच में सामने आए एक बयान के मुताबिक, कुछ अभ्यर्थी परीक्षा के दौरान सवालों को खाली छोड़ देते थे। बाद में OMR शीट में उन सवालों के सामने सही उत्तर चिह्नित किए जाने का आरोप है। इस तरह अभ्यर्थियों के अंक बढ़ाकर उन्हें मेरिट में ऊपर लाने की कथित कोशिश की जाती थी।
इस प्रक्रिया में केवल OMR शीट ही नहीं, बल्कि डिजिटल मूल्यांकन और OSM सिस्टम में भी कथित छेड़छाड़ की बात सामने आई है। जांच एजेंसी अब यह पता लगाने में जुटी है कि परीक्षा प्रक्रिया के किन-किन चरणों में हेरफेर किया गया और इसमें कितने लोग शामिल थे।
कई परीक्षाएं जांच के दायरे में
CID की जांच केवल JSSC-CGL तक सीमित नहीं है। JPSC की 14वीं परीक्षा, फॉरेस्ट रेंज ऑफिसर परीक्षा और बैकलॉग भर्ती परीक्षा में भी कथित अनियमितताओं की जांच की जा रही है। जांच में शामिल बयानों में बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों के पैसे देकर परीक्षा प्रक्रिया में अनुचित लाभ लेने के आरोप लगाए गए हैं। हालांकि, इन दावों की जांच अभी जारी है और आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है।
जांच का दायरा लगातार बढ़ रहा
मामले की गंभीरता को देखते हुए झारखंड सरकार ने जांच का दायरा बढ़ाया है। JSSC-CGL से जुड़ी कथित गड़बड़ियों की जांच के लिए SIT में 17 और अधिकारियों को शामिल किया गया है, जिनमें छह IPS अधिकारी भी हैं। SIT अब तक 37 संदिग्धों से पूछताछ कर चुकी है।
CID की जांच में सामने आ रही जानकारियों से संकेत मिलता है कि मामला केवल प्रश्नपत्र लीक होने तक सीमित नहीं था, बल्कि परीक्षा के बाद OMR और डिजिटल मूल्यांकन प्रक्रिया में कथित हेरफेर तक इसका नेटवर्क पहुंचा हुआ था। अब जांच एजेंसियां इस पूरे नेटवर्क में शामिल एजेंटों, अभ्यर्थियों और परीक्षा प्रक्रिया से जुड़े लोगों की भूमिका की पड़ताल कर रही हैं।

