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बडगाम में मारा गया लश्कर कमांडर LoRa डिवाइस से करता था कम्युनिकेशन, सुरक्षा एजेंसियों की नजर से बचने की कोशिश

बडगाम में मारा गया लश्कर कमांडर LoRa डिवाइस से करता था कम्युनिकेशन, सुरक्षा एजेंसियों की नजर से बचने की कोशिश

जम्मू-कश्मीर के बडगाम में सुरक्षाबलों के साथ मुठभेड़ में मारे गए लश्कर-ए-तैयबा के कमांडर मोहम्मद आसिफ उर्फ हाशिम मूसा को लेकर जांच में उसके संचार के तरीके की जानकारी सामने आई है। सुरक्षा सूत्रों के मुताबिक, आतंकी कथित तौर पर LoRa तकनीक पर आधारित कम्युनिकेशन डिवाइस का इस्तेमाल कर रहा था। दावा है कि इसका इस्तेमाल पारंपरिक संचार माध्यमों पर निर्भरता कम करने और सुरक्षा एजेंसियों की तकनीकी निगरानी से बचने के लिए किया जा रहा था।

मोहम्मद आसिफ उर्फ हाशिम मूसा को 29 सितंबर की रात बडगाम के यूसमर्ग इलाके में हुई मुठभेड़ में सुरक्षाबलों ने मार गिराया था। भारतीय सेना के अनुसार, सेना, जम्मू-कश्मीर पुलिस और CRPF ने विशेष खुफिया सूचना के आधार पर कोराग इलाके में संयुक्त तलाशी अभियान शुरू किया था। तलाशी के दौरान संदिग्ध गतिविधि नजर आने पर सुरक्षाबलों ने चुनौती दी, जिसके बाद गोलीबारी शुरू हुई।

तलाशी के दौरान शव और हथियार बरामद

मुठभेड़ के बाद सुरक्षाबलों ने तलाशी अभियान जारी रखा। सेना के मुताबिक, अगले दिन सुबह पालमaidान क्षेत्र में मोहम्मद आसिफ उर्फ हाशिम मूसा का शव बरामद किया गया। उसके पास से युद्ध संबंधी सामान और हथियार बरामद होने की जानकारी दी गई है।

आसिफ को सुरक्षा एजेंसियां लंबे समय से तलाश रही थीं। रिपोर्टों के मुताबिक वह पाकिस्तान स्थित लश्कर-ए-तैयबा से जुड़ा कमांडर था और जम्मू-कश्मीर में कई आतंकी हमलों से उसका संबंध बताया गया था। उसकी पहचान हाशिम मूसा, मोहम्मद आसिफ और आसिफ फौजी जैसे नामों से भी सामने आई है।

LoRa डिवाइस को लेकर जांच

जांच से जुड़े सूत्रों के अनुसार, उसके पास से कम्युनिकेशन डिवाइस भी मिला है, जिसे LoRa आधारित डिवाइस बताया जा रहा है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि वह इस उपकरण का इस्तेमाल किस तरह और किन लोगों से संपर्क के लिए करता था।

LoRa एक लंबी दूरी के कम-पावर वायरलेस कम्युनिकेशन से जुड़ी तकनीक है। हालांकि, किसी विशेष डिवाइस का वास्तविक इस्तेमाल और उसकी क्षमताएं उसके मॉडल और नेटवर्क व्यवस्था पर निर्भर करती हैं। इसलिए यह कहना कि केवल LoRa डिवाइस के कारण किसी आतंकी को सुरक्षा रडार से पूरी तरह ट्रेस नहीं किया जा सकता, तकनीकी रूप से सही नहीं होगा।

सुरक्षा एजेंसियां अब बरामद डिवाइस और अन्य इलेक्ट्रॉनिक सामग्री की फोरेंसिक जांच कर सकती हैं। इससे उसके संपर्कों, संचार व्यवस्था और आतंकी नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों के बारे में जानकारी मिलने की उम्मीद है।

लंबे समय से चल रहा था ऑपरेशन

सुरक्षा एजेंसियों ने हाशिम मूसा को लेकर लंबे समय तक खुफिया और तकनीकी सूचनाएं जुटाईं। टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, उसके खिलाफ चलाया गया ऑपरेशन मई 2026 से जारी खुफिया प्रयासों का हिस्सा था।

इससे पहले भी यूसमर्ग क्षेत्र में उसके सहयोगियों के खिलाफ कार्रवाई हुई थी। अधिकारियों के मुताबिक, मूसा सुरक्षा बलों की लगातार निगरानी में था और अंततः 29 सितंबर को कोराग क्षेत्र में संयुक्त अभियान के दौरान उसे घेर लिया गया।

मूसा के मारे जाने के बाद सुरक्षा एजेंसियां अब उसके नेटवर्क, संपर्कों और इस्तेमाल किए जा रहे संचार साधनों की पड़ताल कर रही हैं। इस जांच से जम्मू-कश्मीर में सक्रिय आतंकी नेटवर्क की संचार व्यवस्था के बारे में और जानकारी सामने आने की संभावना है।

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