आतंकी संगठनों का नया प्रोपेगैंडा, वीडियो में देखें कश्मीर में युवाओं को भड़काने की साजिश, मैगजीन और दस्तावेजों से बडा खुलासा
कश्मीर में सक्रिय आतंकी संगठनों ने एक बार फिर युवाओं को अपने जाल में फंसाने के लिए संगठित प्रोपेगैंडा अभियान तेज कर दिया है। ऑपरेशन सिंदूर के बाद से जैश-ए-मोहम्मद, लश्कर-ए-तैयबा और हिजबुल मुजाहिदीन जैसे आतंकी संगठन लगातार ऐसे संदेश और सामग्री प्रसारित कर रहे हैं, जिनका मकसद स्थानीय युवाओं को भड़काकर आतंक की राह पर ले जाना है। हाल ही में सामने आए कुछ मैगजीन और दस्तावेजों से इस साजिश का खुलासा हुआ है।
इन दस्तावेजों में कश्मीर में सक्रिय आतंकियों के लिए भावनात्मक और उकसाने वाले संदेश दिए गए हैं। इनमें कठिन हालात, इम्तिहान और अंत में जीत जैसे शब्दों का इस्तेमाल कर युवाओं को यह जताने की कोशिश की गई है कि आतंक के रास्ते पर चलना किसी कथित “संघर्ष” का हिस्सा है। संदेशों में यह भी कहा गया है कि “यह सिर्फ तुम्हारी लड़ाई है” और “जो करना है, खुद करना है”, जिससे युवाओं को अकेले हमले करने या स्थानीय स्तर पर हिंसक गतिविधियों के लिए उकसाया जा सके।
इन मैगजीन और दस्तावेजों के अनुसार, यह सामग्री दिसंबर महीने में आतंकी नेटवर्क के जरिए पब्लिश और सर्कुलेट की गई थी। सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि यह एक सुनियोजित रणनीति का हिस्सा है, जिसके तहत सोशल मीडिया, एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग ऐप्स और ऑफलाइन नेटवर्क के जरिए युवाओं तक पहुंच बनाई जा रही है। इन मैगजीन में न सिर्फ विचारधारात्मक प्रोपेगैंडा है, बल्कि हमलों की तैयारी, संगठन से जुड़ने के तरीके और सुरक्षा बलों से बचने के संकेत भी दिए गए हैं।
सूत्रों के मुताबिक, ऑपरेशन सिंदूर के बाद आतंकियों पर दबाव बढ़ा है और उनके कई नेटवर्क कमजोर पड़े हैं। ऐसे में आतंकी संगठन नए भर्ती की कोशिशों में जुट गए हैं। स्थानीय युवाओं को निशाना बनाकर उन्हें भावनात्मक रूप से यह महसूस कराया जा रहा है कि वे अकेले हैं और हिंसा ही उनका रास्ता है। सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि यह “लोन वुल्फ अटैक” की रणनीति को बढ़ावा देने की कोशिश भी हो सकती है, जिसमें बिना सीधे संपर्क के युवाओं को हमले के लिए प्रेरित किया जाता है।
सुरक्षा एजेंसियां इन दस्तावेजों को गंभीरता से लेते हुए जांच में जुट गई हैं। यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि यह सामग्री किन-किन इलाकों तक पहुंची और इसके पीछे कौन-कौन से आतंकी मॉड्यूल सक्रिय हैं। साथ ही, सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर भी निगरानी बढ़ा दी गई है, ताकि इस तरह के प्रोपेगैंडा को समय रहते रोका जा सके।
प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों ने कश्मीर के युवाओं से अपील की है कि वे ऐसे भ्रामक और उकसाने वाले संदेशों से सावधान रहें। अधिकारियों का कहना है कि आतंकी संगठन युवाओं के भविष्य को अंधकार में धकेलने की कोशिश कर रहे हैं। शिक्षा, संवाद और विकास ही कश्मीर के लिए सही रास्ता है, न कि हिंसा और आतंक।

