छात्रा ने बयान में टीचर पर लगाए गंभीर आरोप, 'टीचर ने प्राइवेट पार्ट छुआ', 19 साल की छात्रा की मौत मामले में नया खुलासा
हिमाचल प्रदेश के एक सरकारी कॉलेज में रैगिंग और बेरहमी से पिटाई के बाद इलाज के दौरान छात्रा की मौत के मामले में लगातार नए और चौंकाने वाले खुलासे हो रहे हैं। अब सामने आया है कि मृतक छात्रा ने अपने बयान में कॉलेज के एक शिक्षक पर भी गंभीर आरोप लगाए थे। छात्रा ने बताया था कि एक टीचर उसका पीछा करता था और उसे मानसिक रूप से परेशान करता था।
छात्रा के बयान के अनुसार, कॉलेज में प्रोफेसर अशोक कुमार ने गलत नीयत से उसके प्राइवेट पार्ट्स को छुआ था। यह आरोप सामने आने के बाद मामला केवल रैगिंग तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यौन उत्पीड़न और संस्थागत लापरवाही के गंभीर सवाल भी खड़े हो गए हैं।
पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि इस मामले में आरोपी बनाए गए तीनों युवक छात्रा के साथ ही फर्स्ट ईयर में पढ़ते थे। मृतक छात्रा फर्स्ट ईयर की परीक्षा में फेल हो गई थी, जबकि आरोपी छात्र आगे की कक्षाओं में पहुंच गए थे। पुलिस को शक है कि इसी बात को लेकर छात्रा को लगातार प्रताड़ित किया जा रहा था।
छात्रा के पिता द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत में कहा गया है कि उनकी बेटी लंबे समय से मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना झेल रही थी। पिता ने आरोप लगाया कि उत्पीड़न सहन न कर पाने की वजह से उनकी बेटी गहरे डिप्रेशन में चली गई थी। शिकायत में यह भी उल्लेख किया गया है कि 18 सितंबर को कॉलेज परिसर में छात्रा के सिर पर बोतल से हमला किया गया, उसके बाल काट दिए गए और उसे बुरी तरह अपमानित किया गया।
पुलिस के अनुसार, घटना के बाद छात्रा ने अलग-अलग जगहों पर 7 अस्पतालों में इलाज कराया था। उसकी हालत लगातार बिगड़ती चली गई और आखिरकार इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। छात्रा की मौत ने पूरे प्रदेश में शिक्षा संस्थानों की सुरक्षा व्यवस्था और एंटी-रैगिंग सिस्टम पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
पुलिस ने इस मामले में आरोपियों के खिलाफ बीएनएस की धारा 75, 115(2), 3(5) और एंटी-रैगिंग एक्ट के तहत केस दर्ज किया है। मामले की जांच जारी है और पुलिस छात्रा के बयान, मेडिकल रिपोर्ट्स और कॉलेज से जुड़े रिकॉर्ड खंगाल रही है।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि सभी आरोपों की निष्पक्ष जांच की जा रही है। शिक्षक पर लगे आरोपों को भी गंभीरता से लिया गया है और संबंधित विभाग से जानकारी मांगी गई है। यदि जांच में आरोप सही पाए गए, तो सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
इस घटना के बाद छात्र संगठनों और सामाजिक संस्थाओं में भारी आक्रोश है। लोग मांग कर रहे हैं कि दोषियों को कड़ी सजा दी जाए और कॉलेज परिसरों में छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए। विशेषज्ञों का कहना है कि रैगिंग और यौन उत्पीड़न जैसे मामलों में समय रहते कार्रवाई न होना पीड़ितों के लिए जानलेवा साबित हो सकता है।

