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हिमालयी क्षेत्रों में आग का रहस्य: जनवरी की कड़ाके की ठंड में कैसे फैल रही हैं आग

हिमालयी क्षेत्रों में आग का रहस्य: जनवरी की कड़ाके की ठंड में कैसे फैल रही हैं आग

उत्तराखंड की यमुना घाटी, केदारनाथ और नंदा देवी के जंगलों से लेकर हिमाचल प्रदेश और कश्मीर तक, पर्वतीय क्षेत्रों में इस बार असामान्य रूप से आग फैल रही है। आम तौर पर इस तरह की आग मई-जून जैसे गर्म और शुष्क मौसम में लगती थी। लेकिन इस बार जनवरी की कड़ाके की ठंड में भी जंगलों में आग भड़क रही है, जबकि तापमान माइनस डिग्री सेल्सियस में दर्ज किया जा रहा है।

इस असामान्य घटना ने न केवल स्थानीय लोगों को चिंतित किया है, बल्कि पर्यावरणविदों और वैज्ञानिकों के बीच भी सवाल खड़ा कर दिया है कि इतनी ठंड में आग कैसे फैल सकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं।

सबसे पहला कारण है मानव गतिविधियाँ। पर्वतीय इलाकों में लोग अक्सर लकड़ी, सूखी घास और पत्तियों का उपयोग जलाने के लिए करते हैं। कभी-कभी आग नियंत्रण से बाहर हो जाती है और जंगल में फैल जाती है। इसके अलावा, पर्वतीय इलाकों में शहरीकरण और पर्यटन ने भी आग लगने की संभावना को बढ़ाया है।

दूसरा कारण है जलवायु परिवर्तन और सूखी परिस्थितियाँ। हिमालयी क्षेत्र में तापमान भले ही माइनस में हो, लेकिन जंगल और सूखी पत्तियाँ ज्वलनशील बनी हुई हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि लगातार कम बर्फबारी और वर्षा की कमी ने जंगल को अत्यंत सूखा और आग के लिए संवेदनशील बना दिया है।

तीसरा कारण है तेज हवाएँ और वायुमंडलीय बदलाव। पर्वतीय इलाकों में हवा की दिशा और गति आग के फैलाव को तेजी से प्रभावित करती है। कई जगहों पर आग फैलते ही तेज हवाओं ने उसे अन्य हिस्सों तक बढ़ा दिया, जिससे नुकसान और बढ़ गया।

स्थानीय प्रशासन और वन विभाग ने आग को नियंत्रित करने के लिए फायर ब्रिगेड, एनडीआरएफ और हेलीकॉप्टर से पानी डालने की कार्रवाई तेज कर दी है। हालांकि, पहाड़ी इलाकों और बर्फीले रास्तों की वजह से आग को पूरी तरह बुझाना चुनौतीपूर्ण है।

विशेषज्ञों का कहना है कि इस आग का असर पर्यावरण और जैव विविधता पर भी पड़ सकता है। आग से जंगल की जड़ें, मृदा और वन्यजीवन प्रभावित होते हैं। इसके अलावा, बर्फ पिघलने की प्रक्रिया और पानी की आपूर्ति पर भी असर पड़ सकता है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि इतनी ठंड में जंगल में आग लगना असामान्य और भयावह है। उन्होंने प्रशासन से अपील की है कि जंगल की सुरक्षा के लिए सख्त निगरानी और आग रोकने के उपाय किए जाएं।

इस घटना ने यह साबित कर दिया है कि प्राकृतिक घटनाओं और मानव गतिविधियों का संतुलन बिगड़ने पर असामान्य और खतरनाक परिणाम सामने आ सकते हैं। विशेषज्ञ आग फैलने के पीछे मानव और प्राकृतिक कारणों दोनों को महत्व दे रहे हैं और चेतावनी दे रहे हैं कि जंगलों की सुरक्षा और जलवायु परिवर्तन पर ध्यान देना अत्यंत जरूरी है।

इस तरह, हिमालयी क्षेत्रों में जनवरी की कड़ाके की ठंड में आग फैलना एक असामान्य और गंभीर पर्यावरणीय घटना बन गया है, जो चेतावनी है कि मानव और प्रकृति के बीच संतुलन बनाए रखना कितना आवश्यक है।

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