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29 रुपये ज्यादा किराया वसूलना HRTC को पड़ा भारी, यात्री को मिलेंगे 50,029 रुपये; जानिए पूरा मामला

29 रुपये ज्यादा किराया वसूलना HRTC को पड़ा भारी, यात्री को मिलेंगे 50,029 रुपये; जानिए पूरा मामला

हिमाचल प्रदेश में बस किराए से जुड़ा एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसमें महज 29 रुपये की अतिरिक्त वसूली HRTC को काफी महंगी पड़ गई। ऊना जिला उपभोक्ता आयोग ने यात्री की शिकायत पर सुनवाई करते हुए हिमाचल रोड ट्रांसपोर्ट कॉरपोरेशन को कुल 50,029 रुपये का भुगतान करने का आदेश दिया है। इसमें 29 रुपये की अतिरिक्त वसूली लौटाने के साथ मानसिक परेशानी और मुकदमेबाजी के खर्च का मुआवजा भी शामिल है।

मामला 13 अगस्त 2024 का है। यात्री ने HRTC की रोडवेज बस से ऊना से हरिद्वार तक सफर किया था। इस यात्रा के लिए उससे 488 रुपये किराया लिया गया। अगले दिन जब यात्री हरिद्वार से ऊना वापस लौट रहा था, तो कंडक्टर ने उससे 517 रुपये किराया मांगा। यात्री ने रकम का भुगतान कर दिया, लेकिन समान दूरी के बावजूद किराए में 29 रुपये के अंतर पर सवाल उठाया।

यात्री के मुताबिक दोनों यात्राओं की दूरी 361 किलोमीटर थी। ऐसे में एक दिन के भीतर एक ही रूट पर किराए में अंतर को लेकर उसने आपत्ति जताई और बाद में उपभोक्ता आयोग का दरवाजा खटखटाया।

HRTC ने टोल बढ़ने का दिया था हवाला

मामले की सुनवाई के दौरान HRTC की ओर से बताया गया कि 13 अगस्त को किराए में बढ़ा हुआ टोल शामिल नहीं हो पाया था। निगम के अनुसार, संबंधित मशीन या सिस्टम में अपडेट नहीं हुआ था। इसके बाद 14 अगस्त को कंडक्टर ने बढ़े हुए टोल को किराए में जोड़कर 517 रुपये वसूले थे।

HRTC ने यह भी दलील दी कि टोल में बढ़ोतरी हुई थी और अधिकारियों के मौखिक निर्देश पर कंडक्टर यात्रियों से संशोधित राशि वसूल रहे थे। हालांकि आयोग के सामने निगम ऐसा स्पष्ट रिकॉर्ड पेश नहीं कर सका, जिससे यह साबित हो सके कि संबंधित मार्ग पर उस समय टोल बढ़ाकर 55 रुपये किया गया था।

आयोग ने रिकॉर्ड की जांच के बाद सुनाया फैसला

आयोग ने HRTC की ओर से पेश किए गए दस्तावेजों की जांच की। सुनवाई के दौरान ऐसा कोई स्पष्ट चार्ट या NHAI रिकॉर्ड सामने नहीं आया, जिससे हरिद्वार-ऊना मार्ग पर संबंधित समय में टोल बढ़ोतरी की पुष्टि होती हो।

आयोग ने यह भी पाया कि HRTC ने जिस दस्तावेज का हवाला दिया था, वह सुपर लग्जरी बसों से संबंधित था, जबकि यात्री ने सामान्य रोडवेज बस में सफर किया था। इसलिए आयोग ने उस दस्तावेज को इस मामले में लागू नहीं माना।

RTI से मिली जानकारी में भी 2024 के दौरान ऊना-हरिद्वार मार्ग का किराया 472 रुपये बताया गया था। इसके बावजूद यात्री से पहली यात्रा में 488 रुपये और वापसी में 517 रुपये लिए गए थे। आयोग के मुताबिक HRTC यह साबित नहीं कर पाया कि वापसी यात्रा में अतिरिक्त राशि वसूलने के लिए सक्षम प्राधिकारी की मंजूरी थी।

29 रुपये के साथ 50 हजार रुपये का मुआवजा

आयोग ने 29 रुपये की अतिरिक्त वसूली को सेवा में कमी और अनुचित व्यापार व्यवहार माना। इसके बाद HRTC को यात्री को 29 रुपये वापस करने के अलावा मानसिक तनाव और उत्पीड़न के लिए 30,000 रुपये तथा मुकदमेबाजी के खर्च के तौर पर 20,000 रुपये देने का आदेश दिया गया।

इस तरह यात्री को कुल 50,029 रुपये मिलेंगे। आयोग ने HRTC को यह राशि निर्धारित समय के भीतर भुगतान करने का निर्देश दिया है। फैसले से यह भी स्पष्ट होता है कि परिवहन सेवा में अतिरिक्त किराया वसूलने के लिए संबंधित शुल्क वृद्धि का उचित और प्रमाणित आधार होना जरूरी है।

यह मामला यात्रियों के उपभोक्ता अधिकारों से भी जुड़ा है। आयोग के फैसले में अतिरिक्त वसूली के साथ सेवा में कमी और उससे हुई परेशानी को भी ध्यान में रखा गया है।

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