हिमाचल में स्थगित वेतन बहाली का आदेश जारी, उपमुख्यमंत्री से लेकर विधायकों तक को राहत, जुलाई में मिलेगा बकाया
हिमाचल प्रदेश में वित्तीय प्रबंधन और वेतन से जुड़े एक अहम फैसले के तहत राज्य सरकार ने जनप्रतिनिधियों के स्थगित किए गए वेतन को बहाल करने की अधिसूचना जारी कर दी है। इस निर्णय के बाद उपमुख्यमंत्री, मंत्रियों, विधानसभा अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और विधायकों को राहत मिलने जा रही है।
यह आदेश Government of Himachal Pradesh की ओर से जारी किया गया है, जिसमें स्पष्ट किया गया है कि मार्च 2026 में खराब वित्तीय स्थिति का हवाला देते हुए रोकी गई वेतन राशि अब फिर से जारी की जाएगी। यह बकाया राशि जुलाई महीने में जून के वेतन के साथ दी जाएगी।
जानकारी के अनुसार, राज्य सरकार ने उस समय वित्तीय दबाव और बजट संतुलन को देखते हुए जनप्रतिनिधियों के वेतन को अस्थायी रूप से स्थगित करने का निर्णय लिया था। सरकार का तर्क था कि आर्थिक स्थिति को देखते हुए खर्चों में नियंत्रण जरूरी है, ताकि विकास कार्यों और जरूरी योजनाओं पर असर न पड़े।
अब हालात में आंशिक सुधार और वित्तीय समीक्षा के बाद सरकार ने यह वेतन बहाली का निर्णय लिया है। अधिसूचना जारी होने के बाद प्रशासनिक स्तर पर भी इसे लागू करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
इस फैसले के तहत उपमुख्यमंत्री, कैबिनेट मंत्रियों, विधानसभा अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और सभी विधायकों को उनका रोका गया वेतन एक साथ जारी किया जाएगा। इससे संबंधित विभागों को निर्देश दे दिए गए हैं कि वे जुलाई माह के वेतन बिल में इस राशि को शामिल करें।
सरकारी सूत्रों के अनुसार, यह कदम न केवल लंबित वेतन भुगतान को पूरा करने के लिए उठाया गया है, बल्कि प्रशासनिक संतुलन और जनप्रतिनिधियों की वित्तीय व्यवस्था को सुचारू रखने के उद्देश्य से भी लिया गया है।
हालांकि, इस फैसले को लेकर राजनीतिक हलकों में चर्चा भी शुरू हो गई है। विपक्षी दल इस मुद्दे को लेकर सरकार से पहले ही सवाल पूछते रहे हैं कि जब जनप्रतिनिधियों का वेतन रोका गया था, तब राज्य की वित्तीय स्थिति कितनी गंभीर थी और अब अचानक इसे बहाल करने का आधार क्या है।
दूसरी ओर सरकार का कहना है कि यह एक अस्थायी निर्णय था, जिसे परिस्थितियों के अनुसार लागू और अब वापस लिया गया है। सरकार के अनुसार, राज्य की वित्तीय स्थिति की नियमित समीक्षा की जाती है और उसी के आधार पर ऐसे फैसले लिए जाते हैं।
इस आदेश के बाद संबंधित जनप्रतिनिधियों को जुलाई में एक साथ बकाया राशि मिलने से बड़ी राहत मिलेगी। वहीं प्रशासनिक विभागों को भी इसे समय पर लागू करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि भुगतान प्रक्रिया में कोई देरी न हो।
फिलहाल इस फैसले को लेकर राज्य की राजनीति में हलचल बढ़ गई है, और आने वाले दिनों में इस पर और बयानबाजी देखने को मिल सकती है।

