पहली पत्नी की मौत के बाद दूसरी पत्नी को मिलेगी फैमिली पेंशन, हिमाचल हाईकोर्ट ने सरकार की अपील खारिज की
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने फैमिली पेंशन से जुड़े एक अहम मामले में दूसरी पत्नी के पक्ष में फैसला सुनाया है। अदालत ने कहा कि पहली पत्नी के निधन के बाद दूसरी पत्नी को केवल इस आधार पर पेंशन के लाभ से वंचित नहीं किया जा सकता कि पहली पत्नी के जीवित रहते उसका विवाह हुआ था। मामले की विशेष परिस्थितियों, लंबे समय तक साथ रहने और आर्थिक-सामाजिक स्थिति को भी ध्यान में रखना होगा।
मामला एक सेवानिवृत्त सरकारी कर्मचारी महेश राम से जुड़ा है। वर्ष 1994 में उनका विवाह कमलेश देवी से हुआ था। इस विवाह से कोई संतान नहीं थी। अदालत के रिकॉर्ड के मुताबिक, उसी वर्ष पहली पत्नी और उसके माता-पिता के आग्रह पर महेश राम ने कमलेश देवी की छोटी बहन ज्वाला देवी से भी हिंदू रीति-रिवाज के अनुसार विवाह किया था। इसके बाद महेश राम, उनकी पहली पत्नी और दूसरी पत्नी लंबे समय तक साथ रहे।
महेश राम वर्ष 2003 में सरकारी सेवा से सेवानिवृत्त हुए और पेंशन प्राप्त कर रहे थे। पहली पत्नी कमलेश देवी का 20 अप्रैल 2020 को निधन हो गया। इसके बाद महेश राम ने विभाग से पेंशन रिकॉर्ड और पेंशन भुगतान आदेश में दूसरी पत्नी ज्वाला देवी का नाम दर्ज करने का अनुरोध किया। विभाग ने यह मांग यह कहते हुए खारिज कर दी कि पहली पत्नी के जीवित रहते दूसरी शादी होने के कारण ज्वाला देवी को फैमिली पेंशन का अधिकार नहीं है।
इसके बाद मामला हाईकोर्ट पहुंचा। अदालत ने मामले की परिस्थितियों पर विचार करते हुए कहा कि दोनों महिलाएं बहनें थीं और पहली पत्नी की मृत्यु तक तीनों लंबे समय तक साथ रहे। अदालत ने लंबे सहवास, सामाजिक न्याय और आर्थिक सुरक्षा जैसे पहलुओं को भी महत्वपूर्ण माना। हाईकोर्ट ने विभाग के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें ज्वाला देवी का नाम पेंशन रिकॉर्ड में दर्ज करने से इनकार किया गया था।
बाद में राज्य सरकार ने इस फैसले के खिलाफ खंडपीठ में अपील की। मुख्य न्यायाधीश जीएस संधावालिया और न्यायमूर्ति बिपिन चंद्र नेगी की खंडपीठ ने सरकार की अपील खारिज कर दी। अदालत ने माना कि पहली पत्नी के निधन के बाद मामले की परिस्थितियों को देखते हुए दूसरी पत्नी को वित्तीय संरक्षण से पूरी तरह वंचित करना उचित नहीं होगा।
अदालत का यह फैसला मामले की विशेष परिस्थितियों पर आधारित है। इसका अर्थ यह नहीं है कि पहली पत्नी के रहते दूसरी शादी सामान्य रूप से कानूनी रूप से मान्य हो गई है। हाईकोर्ट ने विशेष परिस्थितियों और लंबे समय तक साथ रहने के तथ्यों को देखते हुए दूसरी पत्नी को फैमिली पेंशन का लाभ देने का रास्ता साफ किया है।

