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हिमाचल में बढ़े ई-वाहन, लेकिन चार्जिंग स्टेशन कम; हाई कोर्ट ने हर जिला मुख्यालय पर 2 स्टेशन लगाने को कहा

हिमाचल में बढ़े ई-वाहन, लेकिन चार्जिंग स्टेशन कम; हाई कोर्ट ने हर जिला मुख्यालय पर 2 स्टेशन लगाने को कहा

हिमाचल प्रदेश में इलेक्ट्रिक वाहनों की संख्या लगातार बढ़ रही है, लेकिन इनके लिए पर्याप्त चार्जिंग स्टेशन उपलब्ध नहीं होने से बड़ी चुनौती सामने आ रही है। चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी को लेकर हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट ने महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए हैं। कोर्ट ने हर जिला मुख्यालय में कम से कम दो इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग स्टेशन स्थापित करने के आदेश दिए हैं।

ई-वाहनों को बढ़ावा देने के लिए सरकार की ओर से कई स्तरों पर प्रयास किए जा रहे हैं। पेट्रोल-डीजल वाहनों के मुकाबले इलेक्ट्रिक वाहनों को पर्यावरण के लिहाज से बेहतर विकल्प माना जाता है। पहाड़ी राज्य हिमाचल में भी इलेक्ट्रिक बसों और निजी ई-वाहनों की संख्या बढ़ रही है। लेकिन चार्जिंग स्टेशन की सीमित संख्या के कारण वाहन मालिकों को कई बार परेशानी का सामना करना पड़ता है।

चार्जिंग स्टेशन की कमी पर कोर्ट का रुख

हाई कोर्ट के सामने यह मुद्दा आया कि राज्य में ई-वाहनों की संख्या बढ़ने के बावजूद उनके लिए आवश्यक चार्जिंग सुविधाएं पर्याप्त नहीं हैं। खासतौर पर जिला मुख्यालयों और प्रमुख स्थानों पर चार्जिंग स्टेशन की उपलब्धता जरूरी मानी गई।

इसी को ध्यान में रखते हुए कोर्ट ने प्रत्येक जिला मुख्यालय में दो चार्जिंग स्टेशन स्थापित करने के निर्देश दिए हैं। इससे ई-वाहन चालकों को अपने वाहनों को चार्ज करने के लिए लंबी दूरी तय करने की जरूरत कम हो सकती है।

पहाड़ी इलाकों में इंफ्रास्ट्रक्चर बड़ी चुनौती

हिमाचल जैसे पहाड़ी राज्य में चार्जिंग स्टेशन स्थापित करना मैदानी क्षेत्रों की तुलना में चुनौतीपूर्ण हो सकता है। कई इलाके दुर्गम हैं और वहां बिजली तथा सड़क से जुड़ा आधारभूत ढांचा विकसित करने में अतिरिक्त प्रयास की जरूरत पड़ती है।

ई-वाहनों की संख्या बढ़ने के साथ चार्जिंग नेटवर्क को भी उसी अनुपात में विस्तार देना जरूरी है। यदि चार्जिंग स्टेशन पर्याप्त संख्या में उपलब्ध नहीं होंगे तो लंबी दूरी की यात्रा करने वाले लोगों के लिए परेशानी बढ़ सकती है।

ई-वाहनों को बढ़ावा देने में मिलेगी मदद

चार्जिंग स्टेशनों का नेटवर्क मजबूत होने से राज्य में इलेक्ट्रिक वाहनों के इस्तेमाल को बढ़ावा मिल सकता है। लोगों को यह भरोसा मिलेगा कि यात्रा के दौरान जरूरत पड़ने पर वाहन चार्ज करने की सुविधा उपलब्ध है।

जिला मुख्यालयों पर दो-दो चार्जिंग स्टेशन स्थापित होने से सरकारी और निजी दोनों तरह के ई-वाहन उपयोगकर्ताओं को सुविधा मिलने की उम्मीद है। साथ ही यह कदम राज्य में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी के लिए आवश्यक बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण हो सकता है।

अब संबंधित विभागों के सामने कोर्ट के निर्देशों के अनुरूप चार्जिंग स्टेशन स्थापित करने और उनकी सुविधाओं को सुचारु रखने की जिम्मेदारी होगी। आने वाले समय में इन स्टेशनों की संख्या और बढ़ाने की जरूरत भी महसूस हो सकती है, क्योंकि राज्य में ई-वाहनों का इस्तेमाल बढ़ने के साथ चार्जिंग की मांग भी बढ़ेगी।

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