मुख्यमंत्री सुक्खू ने केंद्र की वार्षिक ग्रांट रोकने पर जताई चिंता, भाजपा नेताओं से पूछा सवाल
मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कहा है कि केंद्र सरकार की ओर से हिमाचल प्रदेश को मिलने वाली लगभग 10 हजार करोड़ रुपये की वार्षिक ग्रांट रोकने का कदम राज्य के वित्तीय हितों पर सीधा असर डाल सकता है। उन्होंने भाजपा सांसदों और विधायकों से सवाल किया कि क्या वे प्रदेश के अधिकारों और वित्तीय हितों के लिए अपनी आवाज उठाएंगे।
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि 1 फरवरी से केंद्र सरकार ने हिमाचल को मिलने वाली यह वार्षिक सहायता बंद कर दी है। उन्होंने कहा कि यदि यह ग्रांट आगामी वर्षों में बहाल नहीं होती है, तो पांच वर्ष की अवधि में राज्य को करीब 50 हजार करोड़ रुपये का संभावित वित्तीय नुकसान हो सकता है।
सुक्खू ने कहा कि राज्य सरकार पर पुरानी पेंशन योजना को बंद करने का दबाव बनाया गया, लेकिन सरकार ने किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया। उन्होंने जोर देकर कहा कि प्रदेश के कर्मचारियों और निवृत्त कर्मचारियों के हितों की रक्षा उनकी सरकार की प्राथमिकता है।
मुख्यमंत्री ने भाजपा नेताओं पर निशाना साधते हुए कहा कि हिमाचल प्रदेश के अधिकारों की रक्षा के लिए उन्हें केंद्र सरकार के सामने स्पष्ट और ठोस भूमिका निभानी चाहिए। सुक्खू ने यह भी कहा कि राज्य सरकार हर संभव प्रयास कर रही है कि वित्तीय संसाधनों की कमी के बावजूद जनता को प्रभावित न होने दिया जाए।
राज्य के वित्तीय विशेषज्ञों का कहना है कि केंद्रीय सहायता की इस तरह की कटौती से राज्य की विकास योजनाओं और सामाजिक कल्याण परियोजनाओं पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है। विशेष रूप से सड़क, स्वास्थ्य और शिक्षा क्षेत्रों में परियोजनाओं की प्रगति धीमी हो सकती है।
सुक्खू ने मीडिया से बातचीत में यह भी कहा कि राज्य सरकार वित्तीय संकट से निपटने के लिए वैकल्पिक उपाय तलाश रही है। उन्होंने यह उम्मीद जताई कि राज्य के प्रतिनिधि और सांसद केंद्र के समक्ष हिमाचल प्रदेश के अधिकारों और हितों के लिए प्रभावी ढंग से आवाज उठाएंगे।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि राज्य सरकार राज्य के कर्मचारियों और निवृत्त कर्मचारियों के हितों से समझौता नहीं करेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि पुरानी पेंशन योजना को जारी रखना राज्य सरकार की प्राथमिकता है, और इसे खत्म करने की किसी भी केंद्रीय मांग को स्वीकार नहीं किया जाएगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर केंद्रीय सहायता बहाल नहीं होती है, तो राज्य का वित्तीय संतुलन बिगड़ सकता है, और इससे विकास परियोजनाओं की लागत बढ़ सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि प्रदेश के लिए स्थायी और नियमित वित्तीय संसाधन सुनिश्चित करना आवश्यक है।
इस बीच, राज्य सरकार ने भाजपा सांसदों और विधायकों से अपील की है कि वे हिमाचल प्रदेश के वित्तीय अधिकारों और विकास परियोजनाओं की रक्षा के लिए केंद्र के समक्ष आवाज उठाएं।
मुख्यमंत्री सुक्खू के बयान से यह स्पष्ट है कि राज्य सरकार केंद्र की नीतियों और वित्तीय सहायता में कटौती को गंभीरता से ले रही है। उन्होंने जनता

