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चंबा की प्राकृतिक कशमल की दवा उद्योग में बढ़ती मांग, उत्तराखंड के कारखानों तक पहुंची खेप

चंबा की प्राकृतिक कशमल की दवा उद्योग में बढ़ती मांग, उत्तराखंड के कारखानों तक पहुंची खेप

हिमाचल प्रदेश के चंबा जिले में प्राकृतिक रूप से पाई जाने वाली कशमल अब औषधि उद्योग के लिए महत्वपूर्ण सामग्री बन गई है। कशमल के पत्तों से लेकर जड़ों तक का उपयोग मधुमेह (शुगर), पीलिया, बवासीर और आंखों के रोगों के उपचार में आने वाली दवाओं के निर्माण में किया जाता है।

उत्तराखंड के आम डंडा क्षेत्र में स्थित औषधि कारखानों में चंबा की कशमल की मांग लगातार बढ़ रही है। बीते एक सप्ताह में 68 मालवाहक वाहनों के माध्यम से लगभग 5,850 क्विंटल कशमल की खेप उत्तराखंड भेजी गई है।

चंबा जिले के चुराह और चंबा विधानसभा क्षेत्रों में वन भूमि के साथ-साथ निजी भूमि पर भी कशमल का प्राकृतिक उत्पादन होता है। इससे न केवल औषधि उद्योग की जरूरतें पूरी हो रही हैं, बल्कि स्थानीय लोगों के लिए आर्थिक अवसर भी पैदा हो रहे हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि कशमल जैसे प्राकृतिक औषधीय पौधों का सस्टेनेबल उपयोग न सिर्फ उद्योग की जरूरतों को पूरा करता है, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार और आय के स्रोत को भी मजबूत करता है। चंबा के लिए यह पौधा न सिर्फ औषधि उद्योग का आधार है, बल्कि राज्य की प्राकृतिक संपदा का भी महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है।

सरकारी और औद्योगिक स्तर पर योजना बनाई जा रही है कि कशमल के उत्पादन और आपूर्ति को संगठित रूप से बढ़ाया जाए, ताकि स्थानीय उत्पादकों और औषधि उद्योग दोनों को लाभ मिल सके।

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