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हिमाचल में ‘अपना मेरिट’ नियम साफ, बिना छूट आगे रहने पर आरक्षित वर्ग का अभ्यर्थी अनारक्षित पद पर होगा चयन

हिमाचल में ‘अपना मेरिट’ नियम साफ, बिना छूट आगे रहने पर आरक्षित वर्ग का अभ्यर्थी अनारक्षित पद पर होगा चयन

हिमाचल प्रदेश सरकार ने सरकारी भर्तियों में आरक्षण और मेरिट से जुड़े ‘अपना मेरिट’ नियम को लेकर स्थिति स्पष्ट कर दी है। सरकार के मुताबिक, यदि आरक्षित वर्ग का कोई अभ्यर्थी बिना किसी प्रकार की छूट या रियायत लिए अपनी मेरिट के आधार पर अनारक्षित वर्ग के कटऑफ से ऊपर रहता है, तो उसका चयन अनारक्षित पद पर किया जाएगा। ऐसे अभ्यर्थी को आरक्षित कोटे में समायोजित नहीं किया जाएगा।

बिना छूट मेरिट में आने पर अनारक्षित पद

सरकार की ओर से स्पष्ट किया गया है कि आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों को भर्ती प्रक्रिया में निर्धारित नियमों के तहत कुछ छूट या रियायतें मिल सकती हैं। लेकिन यदि कोई अभ्यर्थी इन छूटों का लाभ लिए बिना अपनी योग्यता और सामान्य प्रतिस्पर्धा के आधार पर अनारक्षित पद की मेरिट में स्थान बनाता है, तो उसे अनारक्षित पद पर ही नियुक्ति दी जाएगी।

इस व्यवस्था का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि आरक्षित वर्ग का ऐसा अभ्यर्थी, जो सामान्य मेरिट में अपनी योग्यता के आधार पर चयनित हुआ है, उसके कारण आरक्षित वर्ग के लिए निर्धारित पद कम न हों।

आरक्षित सीटों पर क्या होगा असर

‘अपना मेरिट’ व्यवस्था का एक अहम पहलू यह है कि सामान्य मेरिट में चयनित आरक्षित वर्ग के उम्मीदवार को आरक्षित कोटे में नहीं गिना जाता। इससे आरक्षित वर्ग के लिए निर्धारित पदों पर अन्य पात्र अभ्यर्थियों के चयन का अवसर बना रहता है।

उदाहरण के तौर पर, अगर किसी भर्ती में अनारक्षित पद के लिए निर्धारित मेरिट तक कोई अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति या अन्य आरक्षित वर्ग का अभ्यर्थी बिना आरक्षण संबंधी छूट का लाभ लिए पहुंचता है, तो उसे अनारक्षित श्रेणी में माना जाएगा।

भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता पर जोर

सरकार के इस स्पष्टीकरण से भर्ती परीक्षाओं में आरक्षण और मेरिट को लेकर पैदा होने वाली भ्रम की स्थिति दूर होने की उम्मीद है। अभ्यर्थियों के लिए यह समझना जरूरी होगा कि आरक्षित वर्ग से संबंधित होना अपने आप में किसी उम्मीदवार को अनारक्षित मेरिट से बाहर नहीं करता।

वहीं, यदि किसी अभ्यर्थी ने भर्ती प्रक्रिया के किसी चरण में आरक्षण से जुड़ी निर्धारित छूट या रियायत का लाभ लिया है, तो उस स्थिति में उसके चयन और श्रेणी निर्धारण के नियम अलग हो सकते हैं। इसलिए उम्मीदवारों को संबंधित भर्ती के विज्ञापन और लागू नियमों को ध्यान से देखना होगा।

सरकार के इस स्पष्टीकरण के बाद भर्ती परीक्षाओं में मेरिट, आरक्षण और चयन प्रक्रिया को लेकर उम्मीदवारों के बीच स्थिति अधिक स्पष्ट होने की उम्मीद है। खास तौर पर उन अभ्यर्थियों के लिए यह महत्वपूर्ण है, जो आरक्षित श्रेणी से होने के बावजूद सामान्य मेरिट में अपने प्रदर्शन के आधार पर चयन की स्थिति में पहुंचते हैं।

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