यमुनानगर: सरकारी स्कूलों में 10 हजार से अधिक छात्रों की संख्या घटी, एक्शन में शिक्षा विभाग; चार चरणों में होगा व्यापक सर्वे
यमुनानगर जिले में सरकारी स्कूलों से छात्रों की संख्या में लगातार गिरावट को लेकर शिक्षा विभाग गंभीर हो गया है। आंकड़ों के अनुसार जिले के सरकारी स्कूलों में 10 हजार से अधिक छात्रों की संख्या कम हो चुकी है, जिसे लेकर विभाग ने इसे चिंताजनक स्थिति बताया है। छात्रों के घटते नामांकन के पीछे की असल वजह जानने और हालात सुधारने के लिए शिक्षा विभाग ने अब चार चरणों में विस्तृत सर्वे कराने का फैसला लिया है।
शिक्षा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि सरकारी स्कूलों में संसाधनों, योजनाओं और सुविधाओं के बावजूद छात्रों की संख्या में इस तरह की गिरावट कई सवाल खड़े करती है। प्राथमिक जांच में सामने आया है कि बड़ी संख्या में छात्र प्राइवेट स्कूलों की ओर रुख कर रहे हैं, जबकि कुछ बच्चों के स्कूल छोड़ने और पलायन जैसे कारण भी सामने आ रहे हैं। हालांकि विभाग का मानना है कि बिना ठोस सर्वे के किसी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी।
इसी को ध्यान में रखते हुए शिक्षा विभाग ने चार चरणों में सर्वे कराने की योजना बनाई है। पहले चरण में स्कूल स्तर पर छात्रों के नामांकन और ड्रॉपआउट से जुड़े आंकड़ों को इकट्ठा किया जाएगा। इसके तहत यह देखा जाएगा कि किन कक्षाओं में छात्रों की संख्या सबसे ज्यादा घटी है और किन इलाकों में यह समस्या अधिक गंभीर है।
दूसरे चरण में शिक्षकों की टीम घर-घर जाकर सर्वे करेगी। इस दौरान उन बच्चों और अभिभावकों से बातचीत की जाएगी, जिन्होंने सरकारी स्कूल छोड़ दिए हैं या अपने बच्चों का दाखिला कहीं और करा लिया है। अभिभावकों से यह जानने की कोशिश की जाएगी कि उन्होंने ऐसा फैसला क्यों लिया और सरकारी स्कूलों में उन्हें किन कमियों का सामना करना पड़ा।
तीसरे चरण में स्कूलों की बुनियादी सुविधाओं, शिक्षकों की उपलब्धता, पढ़ाई के स्तर और सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन की समीक्षा की जाएगी। इसमें मिड-डे मील, मुफ्त किताबें, यूनिफॉर्म, छात्रवृत्ति जैसी योजनाओं का जमीनी स्तर पर आकलन किया जाएगा, ताकि यह समझा जा सके कि योजनाएं सही तरीके से लागू हो रही हैं या नहीं।
चौथे और अंतिम चरण में सर्वे रिपोर्ट के आधार पर सुधारात्मक कदम उठाए जाएंगे। शिक्षा विभाग का कहना है कि जहां भी कमियां पाई जाएंगी, वहां तुरंत सुधार किया जाएगा। जरूरत पड़ने पर शिक्षकों की तैनाती, इंफ्रास्ट्रक्चर में सुधार और पढ़ाई के स्तर को बेहतर बनाने के लिए विशेष योजनाएं लागू की जाएंगी।
जिला शिक्षा अधिकारी ने बताया कि सरकार का उद्देश्य है कि हर बच्चा गुणवत्तापूर्ण शिक्षा से जुड़े और सरकारी स्कूलों पर अभिभावकों का भरोसा बना रहे। छात्रों की संख्या में आई गिरावट को किसी भी सूरत में नजरअंदाज नहीं किया जाएगा। इसके लिए स्कूल प्रबंधन समितियों और पंचायत स्तर पर भी सहयोग लिया जाएगा।
यमुनानगर में सरकारी स्कूलों से छात्रों का कम होना न सिर्फ शिक्षा व्यवस्था बल्कि सामाजिक ढांचे के लिए भी चिंता का विषय है। शिक्षा विभाग द्वारा शुरू किया गया यह चार चरणों वाला सर्वे आने वाले समय में कई अहम कारणों को उजागर कर सकता है और उम्मीद की जा रही है कि इसके बाद सरकारी स्कूलों में फिर से छात्रों की संख्या बढ़ाने की दिशा में ठोस कदम उठाए जाएंगे।

