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रालोद के प्रदेशाध्यक्ष सांगवान ने दिया इस्तीफा, कार्यकारिणी के अन्य सदस्यों ने भी छोड़ा पद

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राष्ट्रीय लोकदल (रालोद) को हरियाणा में उस समय बड़ा राजनीतिक झटका लगा, जब दादरी के पूर्व विधायक और रालोद की हरियाणा इकाई के अध्यक्ष जगजीत सिंह सांगवान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने न केवल प्रदेश अध्यक्ष पद छोड़ा, बल्कि पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से भी तत्काल प्रभाव से त्यागपत्र दे दिया है। इस फैसले से हरियाणा की सियासत में हलचल तेज हो गई है।

जगजीत सिंह सांगवान ने अपना इस्तीफा रालोद के राष्ट्रीय अध्यक्ष जयंत चौधरी को भेज दिया है। उनके साथ-साथ प्रदेश कार्यकारिणी के कई अन्य सदस्यों ने भी अपने-अपने इस्तीफे पार्टी नेतृत्व को सौंप दिए हैं। एक साथ इतने नेताओं के इस्तीफे से यह साफ है कि पार्टी के भीतर लंबे समय से असंतोष पनप रहा था, जो अब खुलकर सामने आ गया है।

सूत्रों के मुताबिक, सांगवान पार्टी की नीतियों और संगठनात्मक फैसलों से काफी समय से नाराज चल रहे थे। हरियाणा में संगठन को मजबूत करने, जमीनी कार्यकर्ताओं को तवज्जो देने और आगामी चुनावों को लेकर स्पष्ट रणनीति न होने से वे असहज थे। पार्टी नेतृत्व से कई बार संवाद के बावजूद उनकी चिंताओं का समाधान नहीं हो सका, जिसके बाद उन्होंने यह बड़ा कदम उठाया।

जगजीत सिंह सांगवान हरियाणा की राजनीति में एक जाना-पहचाना नाम रहे हैं। दादरी विधानसभा क्षेत्र से विधायक रह चुके सांगवान को जाट राजनीति और किसान आंदोलनों से जुड़ा एक प्रभावशाली चेहरा माना जाता है। उनके इस्तीफे को रालोद के लिए सिर्फ संगठनात्मक नहीं, बल्कि राजनीतिक नुकसान के रूप में भी देखा जा रहा है।

हरियाणा में रालोद पहले ही सीमित राजनीतिक आधार से जूझ रही है। ऐसे में प्रदेश अध्यक्ष और कार्यकारिणी सदस्यों का इस्तीफा पार्टी की स्थिति को और कमजोर कर सकता है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह घटनाक्रम आगामी विधानसभा और लोकसभा चुनावों से पहले रालोद के लिए चिंता का विषय बन सकता है।

हालांकि, अभी तक रालोद की ओर से इस मुद्दे पर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। पार्टी सूत्रों का कहना है कि नेतृत्व स्तर पर स्थिति की समीक्षा की जा रही है और जल्द ही इस पर प्रतिक्रिया दी जा सकती है। वहीं, यह भी चर्चा है कि पार्टी नेतृत्व सांगवान और अन्य नेताओं को मनाने की कोशिश कर सकता है।

दूसरी ओर, सांगवान के इस्तीफे के बाद उनके अगले राजनीतिक कदम को लेकर भी अटकलें तेज हो गई हैं। कयास लगाए जा रहे हैं कि वे किसी अन्य राजनीतिक दल का रुख कर सकते हैं या फिर स्वतंत्र रूप से अपनी राजनीतिक रणनीति तय कर सकते हैं। हालांकि, इस संबंध में उन्होंने फिलहाल कोई सार्वजनिक बयान नहीं दिया है।

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