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भारतीय रेलवे में बदलाव की तैयारी, लेकिन कालका-शिमला रूट पर अब भी कायम है बड़ोग स्टेशन की ऐतिहासिक पहचान

भारतीय रेलवे में बदलाव की तैयारी, लेकिन कालका-शिमला रूट पर अब भी कायम है बड़ोग स्टेशन की ऐतिहासिक पहचान

भारतीय रेलवे जहां एक ओर ब्रिटिश काल के प्रतीकों और नामों को बदलने की दिशा में कदम बढ़ा रहा है, वहीं हिमाचल प्रदेश के प्रसिद्ध कालका-शिमला रेलखंड पर आज भी इतिहास की एक झलक देखने को मिलती है। इस रूट पर स्थित बड़ोग स्टेशन अब भी ब्रिटिश इंजीनियर बड़ोग के नाम से जाना जाता है।

सूत्रों के अनुसार, रेलवे प्रशासन विभिन्न रेलवे संपत्तियों, स्टेशनों और संरचनाओं से औपनिवेशिक काल से जुड़े प्रतीकों और नामों को हटाने या पुनः नामकरण की समीक्षा कर रहा है। इसका उद्देश्य भारतीय सांस्कृतिक पहचान को अधिक प्रमुखता देना बताया जा रहा है।

हालांकि, कालका-शिमला रेलमार्ग पर स्थित बड़ोग स्टेशन अपनी ऐतिहासिक विरासत के कारण विशेष महत्व रखता है। यह स्टेशन प्रसिद्ध बड़ोग सुरंग के लिए भी जाना जाता है, जिसका निर्माण ब्रिटिश काल में इंजीनियर बड़ोग के नेतृत्व में किया गया था।

स्थानीय इतिहासकारों का मानना है कि यह स्टेशन केवल एक नाम नहीं, बल्कि भारतीय रेलवे इंजीनियरिंग इतिहास का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसलिए इसे पूरी तरह बदलने के बजाय इसकी ऐतिहासिक पहचान को संरक्षित रखने की भी मांग की जाती रही है।

रेलवे अधिकारियों का कहना है कि ऐसे मामलों में संतुलित दृष्टिकोण अपनाया जा रहा है, ताकि एक ओर ऐतिहासिक धरोहर को संरक्षित रखा जा सके और दूसरी ओर भारतीय पहचान को भी मजबूत किया जा सके।

फिलहाल, इस मुद्दे पर अंतिम निर्णय संबंधित समितियों और समीक्षा प्रक्रिया के बाद लिया जाएगा। तब तक बड़ोग स्टेशन अपनी ऐतिहासिक पहचान के साथ कालका-शिमला रूट पर यात्रियों को अपनी विरासत की कहानी सुनाता रहेगा।

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