पत्नी के इलाज का पूरा खर्च नहीं मिला तो उपभोक्ता आयोग पहुंचे पति, अब इंश्योरेंस कंपनी को भरनी होगी पूरी राशि
हेल्थ इंश्योरेंस क्लेम को लेकर एक महत्वपूर्ण मामले में उपभोक्ता को बड़ी राहत मिली है। पत्नी के इलाज के बाद बीमा कंपनी द्वारा पूरा दावा नहीं चुकाने पर एक व्यक्ति ने उपभोक्ता आयोग का दरवाजा खटखटाया। लंबी कानूनी लड़ाई के बाद आयोग ने बीमाधारक के पक्ष में फैसला सुनाया है और बीमा कंपनी को बकाया राशि के साथ मुआवजा तथा कानूनी खर्च का भुगतान करने का आदेश दिया है।
जानकारी के अनुसार, व्यक्ति की पत्नी गंभीर रूप से बीमार हो गई थीं और उनके इलाज पर बड़ी रकम खर्च हुई थी। इलाज के कुछ सप्ताह बाद उनकी मौत हो गई। इस कठिन समय में परिवार को उम्मीद थी कि हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी के तहत इलाज का खर्च वापस मिल जाएगा।
हालांकि, जब उन्होंने बीमा कंपनी के समक्ष क्लेम दायर किया तो कंपनी ने इलाज के कुल खर्च का केवल लगभग एक-तिहाई हिस्सा ही मंजूर किया। शेष राशि का भुगतान करने से इंश्योरेंस कंपनी ने इनकार कर दिया। इससे परिवार को आर्थिक और मानसिक परेशानी का सामना करना पड़ा।
बीमा कंपनी के रवैये से असंतुष्ट होकर पीड़ित व्यक्ति ने उपभोक्ता आयोग में शिकायत दर्ज कराई। सुनवाई के दौरान उन्होंने इलाज से जुड़े दस्तावेज, मेडिकल रिकॉर्ड और बीमा पॉलिसी की शर्तें आयोग के समक्ष प्रस्तुत कीं। मामले की विस्तृत जांच और दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद आयोग ने पाया कि बीमा कंपनी की ओर से सेवा में कमी बरती गई है।
आयोग ने अपने फैसले में बीमा कंपनी को निर्देश दिया कि वह बीमाधारक को बकाया बीमा राशि का भुगतान करे। इसके अलावा मानसिक उत्पीड़न और असुविधा के लिए मुआवजा देने तथा कानूनी कार्यवाही में हुए खर्च की भरपाई करने का भी आदेश दिया गया।
उपभोक्ता अधिकारों से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि यह फैसला उन लोगों के लिए महत्वपूर्ण है, जो बीमा कंपनियों द्वारा क्लेम में कटौती या अस्वीकृति का सामना करते हैं। यह निर्णय बताता है कि यदि उपभोक्ता के साथ अन्याय होता है तो वह कानूनी माध्यमों से न्याय प्राप्त कर सकता है।
यह मामला एक बार फिर दर्शाता है कि बीमा कंपनियों को पॉलिसीधारकों के दावों का निपटारा पारदर्शी और निष्पक्ष तरीके से करना चाहिए। वहीं, उपभोक्ताओं को भी अपने अधिकारों के प्रति जागरूक रहना चाहिए और जरूरत पड़ने पर कानूनी विकल्पों का इस्तेमाल करना चाहिए।

