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गुरुग्राम में 436 बीघा से ज्यादा जमीन ग्राम पंचायत की, सुप्रीम कोर्ट ने पलटा हाईकोर्ट का फैसला

गुरुग्राम में 436 बीघा से ज्यादा जमीन ग्राम पंचायत की, सुप्रीम कोर्ट ने पलटा हाईकोर्ट का फैसला

गुरुग्राम की जमीन से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। शीर्ष अदालत ने सोमवार को 436 बीघा से अधिक जमीन का स्वामित्व ग्राम पंचायत को बहाल कर दिया। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने वर्ष 2007 में जमीन पर निजी स्वामित्व के दावों को मान्यता देने वाले पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के फैसले को भी खारिज कर दिया।

सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद जमीन के मालिकाना हक को लेकर लंबे समय से चल रहा विवाद एक बार फिर चर्चा में आ गया है। अदालत के निर्णय से संबंधित जमीन पर निजी स्वामित्व का दावा करने वाले पक्षों को बड़ा झटका लगा है, जबकि ग्राम पंचायत के अधिकार को मजबूती मिली है।

मामला गुरुग्राम की 436 बीघा से अधिक जमीन के स्वामित्व से जुड़ा था। जमीन पर निजी पक्षों की ओर से मालिकाना हक का दावा किया गया था। इस विवाद में पहले पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने वर्ष 2007 में निजी स्वामित्व के दावों को मान्यता दी थी। हाई कोर्ट के उस फैसले के बाद जमीन के मालिकाना हक को लेकर स्थिति निजी पक्षों के पक्ष में चली गई थी।

इसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, जहां शीर्ष अदालत ने पूरे विवाद पर सुनवाई की। सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के वर्ष 2007 के फैसले को खारिज करते हुए जमीन का स्वामित्व ग्राम पंचायत को बहाल करने का आदेश दिया।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले को स्थानीय स्तर पर भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इतनी बड़ी मात्रा में जमीन के मालिकाना हक को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा था। अदालत के आदेश के बाद अब संबंधित जमीन पर ग्राम पंचायत के स्वामित्व की स्थिति बहाल हो गई है।

इस फैसले का असर जमीन से जुड़े भविष्य के दावों और इस्तेमाल पर भी पड़ सकता है। अब निजी पक्षों की ओर से किए गए स्वामित्व दावों की स्थिति सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मुताबिक तय होगी। प्रशासन और संबंधित स्थानीय निकाय के स्तर पर भी फैसले के बाद आगे की प्रक्रिया अपनाई जा सकती है।

गुरुग्राम में जमीन की बढ़ती कीमतों और तेजी से हो रहे शहरी विस्तार के बीच इस तरह के विवाद बेहद महत्वपूर्ण हो जाते हैं। ऐसे में 436 बीघा से अधिक जमीन पर ग्राम पंचायत का स्वामित्व बहाल करने वाला सुप्रीम कोर्ट का फैसला जमीन के अधिकार और सार्वजनिक संपत्ति से जुड़े मामलों में अहम माना जा रहा है।

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