'मिर्चपुर कांड से लेकर नूंह हिंसा तक' हरियाणा में कांग्रेस और चौटाला दबंगराज में जले दलित और महिलाएं
नेशनल न्यूज़ डेस्क, हरियाणा चुनाव विधानसभा चुनावों का बिगुल बजने के बाद से ही सभी राजनीति पार्टियां जोर-शोर से तैयारियों में जुट गई हैं। प्रदेश की 90 विधानसभा सीटों पर 1 अक्टूबर को एक ही चरण में वोटिंग होगी, जिसके नतीजे जम्मू कश्मीर चुनावों के साथ 8 अक्तूबर को आएंगे। चुनाव की तारीखों के एलान के बाद सभी दल चुनाव मैदान में उतर चुके हैं। पार्टियां प्रत्याशी तय करने के लिए लगातार बैठकें कर रही हैं। आने वाले समय में भाजपा और कांग्रेस दोनों पहली सूची भी जारी कर सकती हैं।
हालाँकि, आगे हरियाणा चुनाव और राजनीती की बात हो तो यहां कांग्रेस और भाजपा के साथ चौटाला परिवार का जिक्र भी काफी महत्वपूर्ण हो जाता है। करीब 40 सालों तक हरियाणा की राजनीति पर राज करने वाले इस परिवार की तीसरी और चौथी पीढ़ी भी राजनीतिक दंगल का हिस्सा है। लेकिन, इतिहास के पन्नों से हरियाणा में कांग्रेस और ओम प्रकाश चौटाला के शासन काल को अक्सर आतंक या दबंगई के युग के रूप में ही याद किया जाता है। इनके राज में प्रदेश के अपराध में उल्लेखनीय वृद्धि, व्यापक भ्रष्टाचार, गुंडाराज, भय और अराजकता का शासन रहा है। इन दोनों की राजनैतिक परिवारों की सरकार के समय दलितों और वंचित समुदायों के प्रति खासकर क्रूरता हुई है। इसमें सबसे खास 1980 और 1990 के दशकों में कांग्रेस शासन के दौरान हरियाणा में दलितों के खिलाफ हिंसा की कई घटनाएं हुई है। दलितों पर क्रूरतापूर्वक हमले, हिंसा और भेदभाव की घटनाओं में सबसे महत्वपूर्ण यहां मिर्चपुर और गोहाना में हुई दुखद घटनाएं रही है, तो आईये जाने इनके बारे में विस्तार से.....
2010 का मिर्चपुर कांड
2010 में हिसार जिले के मिर्चपुर गांव को हरियाणा के इतिहास में काले अक्षरों से लिखा गया है। यह वो घटना है जब कुछ दबंगों ने दलित बस्ती में बर्बरता का नंगा नाच किया था। यह दिल दहला देने वाली घटना बेहद मामूली सी बात पर हुई थी। 13 साल पहले हिसार के मिर्चपुर (Mirchpur Kand) में दलित बस्ती से एक दबंग परिवार का दामाद गुजर रहा था। इसी दौरान उस शख्स पर एक कुत्ते ने भौंकना शुरू कर दिया। बस इतनी सी बात पर दबंगों ने दलितों के साथ झगड़ा शुरू कर दिया। इस हमले में एक 70 वर्षीय व्यक्ति और उसकी विकलांग बेटी की मौत हो गई। इस घटना ने राज्य और देशभर में जातिगत तनाव को बढ़ाया।
होंद चिल्लर नरसंहार
होंद चिल्लर नरसंहार ने पूरे हरियाणा को झकझोर कर रखा दिया था। इस नरसंहार का संबंध 1984 के सिख विरोधी दंगों से है। होंद चिल्लर गांव को रेवाड़ी जिले में आजादी के बाद पाकिस्तान से आए एक विशेष समुदाय के लोगों ने बसाया था। अक्बूटर 1984 में जब तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या की गई तो कथित तौर पर उपद्रवियों ने, जो एक विशेष पार्टी से संबंध रखते थे, होंध गांव के 32 लोगों की हत्या कर दी। उपद्रवियों ने गांव के कई घरों और भवनों को भी आग के हवाले कर दिया था।
गांवों में जातिगत हिंसा की मिला बढ़ावा
कांग्रेस के शासनकाल में दलितों के खिलाफ हिंसा की कई घटनाएं रिपोर्ट की गईं, जहां उन्हें सामाजिक और आर्थिक रूप से दबाने की कोशिश की गई। इन घटनाओं के कारण कांग्रेस की सरकार की आलोचना हुई और दलितों के प्रति संवेदनहीनता के आरोप लगाए गए।
2012 का मनोहर सिंह हत्या और रेप केस
कैथल जिले में एक दलित लड़की के साथ बलात्कार और हत्या की घटना हुई, जिसने राज्यभर में आक्रोश पैदा किया। यह घटना कांग्रेस शासनकाल के दौरान हुई थी, जिसमे लड़की की हत्या कर दी गई थी। इस घटना ने हरियाणा में महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अपराधों की ओर ध्यान खींचा था।
2005 से 2014 के बीच हुई बेहिसाब गैंगरेप की घटनाएं
भूपिंदर सिंह हुड्डा के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार के दौरान हरियाणा में कई गैंगरेप की घटनाएं हुईं। इन मामलों में जघन्य अपराधों की एक बडी संख्या आई, जिनमें से कुछ ने राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियां बटोरीं। इनमें हिसार, गुड़गांव, और रोहतक जैसे जिलों में हुई घटनाएं प्रमुख थीं।
हुड्डा शासन के दौरान 1 महीने में 19 रेप
2013 की संसदीय समिति ने भूपिंदर सिंह हुड्डा के शासनकाल में अनुसूचित जातियों की स्थिति को 'खतरनाक' बताया, जिसमें एससी और एसटी अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत पूरी जांच या दोषसिद्धि की अनुपस्थिति पर प्रकाश डाला गया। पुलिस ने एक खास समुदाय के खिलाफ कार्रवाई करने में विफल रहने के कारण उन्हें कानून अपने हाथ में लेने का मौका दिया, जिससे राज्य की कानून व्यवस्था और कमजोर हुई। हुड्डा के शासन के दौरान महिलाओं, खासकर अनुसूचित जाति समुदाय की महिलाओं के खिलाफ अपराध में बहुत तेजी से वृद्धि हुई। अकेले एक महीने में ही 19 बलात्कार की घटनाएं दर्ज की गईं, जिनमें से ज्यादातर अनुसूचित जाति की महिलाएं थीं। इन अपराधों के प्रति कांग्रेस का रवैया चौंकाने वाला और नकारात्मक रहा।
आखिर क्यों चुप थी कांग्रेस ?
कांग्रेस के हिसार जिले के प्रवक्ता धर्मबीर गोयत का बयान कि बलात्कार के लिए राज्य सरकार जिम्मेदार नहीं है। वास्तव में, ज्यादातर मामलों में सहमति से यौन संबंध होते हैं। महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान के प्रति पार्टी की उपेक्षा का प्रमाण है। इस तरह के बयान पार्टी के भीतर महिलाओं के प्रति गहरी असम्मान की भावना को दर्शाते हैं। बंद दरवाजों के पीछे कथित दुर्व्यवहार के कारण महिला नेताओं द्वारा कांग्रेस से इस्तीफा देने की बढ़ती प्रवृत्ति से यह असम्मान और भी स्पष्ट हो जाता है।
किरण चौधरी और उनकी बेटी श्रुति चौधरी का हरियाणा कांग्रेस से इस्तीफा इस बात को रेखांकित करता है कि पार्टी महिलाओं का सम्मान करने में विफल रही है। यहां तक कि हरियाणा की पूर्व मंत्री सावित्री जिंदल जैसे प्रमुख नेताओं ने भी पार्टी की विभाजनकारी नीतियों और महिलाओं के अधिकारों के प्रति प्रतिबद्धता की कमी से निराश होकर पार्टी छोड़ दी। कांग्रेस और चौटाला के शासन के दौरान, हरियाणा अपराध, भ्रष्टाचार और न्याय की कमी से त्रस्त था। राज्य के सबसे कमजोर समुदायों ने सबसे अधिक उत्पीड़न झेला, क्योंकि सरकार उनकी रक्षा करने में विफल रही।
NCRB के अपराधिक आंकड़ें
हरियाणा में कांग्रेस शासन के दौरान महिलाओं के खिलाफ अपराधों की दर को लेकर आलोचना की गई। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो के आंकड़ों के अनुसार 2005 से 2014 के बीच महिलाओं के खिलाफ अपराधों में वृद्धि हुई। प्रमुख दंगों में मारे गए लोगों की संख्या सीमित थी, लेकिन सामाजिक और जातिगत तनाव को भड़काने में इन घटनाओं का बड़ा योगदान रहा। महिलाओं के अपराध: महिलाओं के खिलाफ अपराध, खासकर बलात्कार और हत्या, कांग्रेस शासन के दौरान बढ़े हुए दिखे।
2010 से 2014 के बीच महिलाओं के खिलाफ बढ़े अपराध
बलात्कार के मामले
2010 से 2014 के बीच बलात्कार के मामलों में लगातार वृद्धि हुई, इसका अंदाजा आप इस बात से लगा सकते है कि 2010 में जो मामले 733 थे वो 2014 में बढ़कर 1,187 हो गए।
दहेज हत्या
दहेज हत्या के मामले भी इस अवधि के दौरान महत्वपूर्ण संख्या में बने रहे, आंकड़ों के अनुसार 2010 में जो मामले 259 थे, वो 2014 में घटकर 245 हो गए।
घरेलू हिंसा
घरेलू हिंसा के मामले, जो आईपीसी धारा 498A के तहत दर्ज किए जाते हैं, वो भी इस अवधि में काफी तेज़ी से बढ़े, जानकारी के अनुसार 2010 में जो मामले 1,168 थे, वो 2014 में बढ़कर 2,274 हो गए।
कुल मिलाकर, हरियाणा में कांग्रेस और चौटाला का शासन अपराध दर में वृद्धि, भ्रष्टाचार और न्याय की कमी के लिए याद किया जाता है। उनके कार्यकाल के दौरान दलितों और महिलाओं जैसे सबसे कमजोर समुदायों को उत्पीड़न का खामियाजा भुगतना पड़ा।

