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गुरुग्राम में 100 साल पुराने बाबा बालकनाथ मंदिर पर चला बुलडोजर, जमीन कब्जे के आरोप पर कार्रवाई से लोगों में रोष

गुरुग्राम में 100 साल पुराने बाबा बालकनाथ मंदिर पर चला बुलडोजर, जमीन कब्जे के आरोप पर कार्रवाई से लोगों में रोष

हरियाणा के गुरुग्राम में करीब 100 साल पुराने बाबा बालकनाथ मंदिर पर प्रशासन की कार्रवाई के बाद स्थानीय लोगों में नाराजगी बढ़ गई है। प्रशासन ने मंदिर परिसर में तोड़फोड़ की कार्रवाई करते हुए निर्माण को हटाया है। बताया जा रहा है कि मंदिर प्रबंधन पर हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (HSVP) की करीब तीन एकड़ जमीन पर कब्जा करने का आरोप था।

प्रशासन की कार्रवाई के बाद इलाके में तनाव का माहौल है। स्थानीय लोगों ने इस कार्रवाई का विरोध जताते हुए रविवार को पंचायत बुलाने का ऐलान किया है। लोगों का कहना है कि मंदिर काफी पुराना है और यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु आते हैं।

जमीन कब्जे के आरोप में हुई कार्रवाई

प्रशासन के अनुसार, मंदिर परिसर का निर्माण जिस जमीन पर किया गया था, वह HSVP की जमीन बताई जा रही है। इसी आधार पर अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की गई।

कार्रवाई के दौरान प्रशासनिक अधिकारी और पुलिस बल मौके पर मौजूद रहे। सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई थी।

स्थानीय लोगों में भारी नाराजगी

मंदिर पर हुई कार्रवाई के बाद स्थानीय लोगों ने प्रशासन के खिलाफ नाराजगी जताई है। उनका कहना है कि मंदिर वर्षों पुराना है और लोगों की धार्मिक आस्था इससे जुड़ी हुई है।

लोगों का आरोप है कि प्रशासन को कार्रवाई से पहले स्थानीय लोगों और मंदिर प्रबंधन से बातचीत करनी चाहिए थी। उन्होंने इस मामले को लेकर विरोध प्रदर्शन और पंचायत के जरिए आगे की रणनीति बनाने की बात कही है।

रविवार को बुलाई गई पंचायत

स्थानीय लोगों ने मंदिर तोड़फोड़ के विरोध में रविवार को पंचायत बुलाने का फैसला किया है। इसमें बड़ी संख्या में लोगों के शामिल होने की संभावना जताई जा रही है।

पंचायत में प्रशासन की कार्रवाई, मंदिर के भविष्य और आगे की रणनीति को लेकर चर्चा की जाएगी। लोगों का कहना है कि वे शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात प्रशासन तक पहुंचाएंगे।

प्रशासन और लोगों के बीच बढ़ा विवाद

मंदिर और जमीन को लेकर विवाद अब स्थानीय स्तर पर बड़ा मुद्दा बनता जा रहा है। प्रशासन जहां इसे अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई बता रहा है, वहीं स्थानीय लोग इसे धार्मिक स्थल पर कार्रवाई के रूप में देख रहे हैं।

फिलहाल पूरे मामले में प्रशासन और स्थानीय लोगों के अलग-अलग दावे सामने आ रहे हैं। आने वाले दिनों में पंचायत और प्रशासनिक स्तर पर होने वाली बातचीत के बाद ही स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी।

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