अंबाला में नाबालिग की कटी बाजू का मामला: सरकारी तंत्र की संवेदनहीनता उजागर, मानवाधिकार आयोग ने लिया संज्ञान
हरियाणा के अंबाला से सामने आया एक दिल दहला देने वाला मामला सरकारी तंत्र की संवेदनहीनता और लापरवाही को उजागर करता है। यहां एक नाबालिग बच्चे की बाजू चारा काटने की मशीन में कट गई, लेकिन इलाज और मदद के बजाय अमानवीयता की सारी हदें पार कर दी गईं। आरोप है कि डेयरी मालिक ने बच्चे की कटी हुई बाजू को यमुना नदी में फेंक दिया और गंभीर रूप से घायल बच्चे को उसके हाल पर छोड़ दिया।
घटना के बाद जिस तरह प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग ने रवैया अपनाया, उसने सिस्टम पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पलवल पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की भूमिका इस पूरे मामले में लापरवाह और असंवेदनशील बताई जा रही है। घायल नाबालिग को समय पर उचित इलाज और कानूनी सहायता नहीं मिल सकी, जिससे मामला और भी गंभीर हो गया।
इस प्रकरण में राहत की बात यह रही कि जीआरपी इंस्पेक्टर सत्य प्रकाश ने पूरे मामले की गंभीरता को समझते हुए विस्तृत और निष्पक्ष जांच की। उनकी जांच में न सिर्फ घटना की सच्चाई सामने आई, बल्कि सरकारी तंत्र की खामियां भी उजागर हुईं। इंस्पेक्टर सत्य प्रकाश की रिपोर्ट के आधार पर हरियाणा मानवाधिकार आयोग ने इस मामले का स्वतः संज्ञान लिया है।
मानवाधिकार आयोग ने मामले को गंभीर मानवाधिकार उल्लंघन मानते हुए संबंधित विभागों से जवाब तलब किया है। आयोग ने यह भी निर्देश दिया है कि पूरे प्रकरण की विस्तृत रिपोर्ट जल्द से जल्द सौंपी जाए। इस संबंध में रेलवे एसपी नीतिका गहलोत को जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। आयोग अब यह भी जांच करेगा कि आखिर किन स्तरों पर लापरवाही हुई और इसके लिए कौन-कौन जिम्मेदार हैं।
इस बीच, मानवाधिकार आयोग ने जीआरपी इंस्पेक्टर सत्य प्रकाश की कार्यशैली की सराहना भी की है। आयोग ने उन्हें इस मामले में संवेदनशीलता और निष्पक्ष जांच के लिए प्रशंसा के लिए अनुशंसित किया है। आयोग का कहना है कि यदि सभी अधिकारी इसी तरह अपनी जिम्मेदारी निभाएं, तो पीड़ितों को समय पर न्याय मिल सकता है।
घटना ने बाल श्रम, औद्योगिक सुरक्षा और प्रशासनिक जवाबदेही जैसे मुद्दों को भी फिर से चर्चा में ला दिया है। सवाल उठ रहा है कि एक नाबालिग बच्चे से डेयरी में खतरनाक मशीन पर काम कैसे कराया जा रहा था और हादसे के बाद आरोपी डेयरी मालिक के खिलाफ तत्काल सख्त कार्रवाई क्यों नहीं की गई।
मानवाधिकार कार्यकर्ताओं का कहना है कि यह मामला सिर्फ एक हादसा नहीं, बल्कि सिस्टम की सामूहिक विफलता का उदाहरण है। बच्चे को न्याय और उचित मुआवजा दिलाने के साथ-साथ दोषियों पर कड़ी कार्रवाई जरूरी है, ताकि भविष्य में इस तरह की अमानवीय घटनाएं दोहराई न जाएं।

