गुरुग्राम की बिजली व्यवस्था में निजी कंपनी की एंट्री, अडानी समूह ने लाइसेंस के लिए लगाई अर्जी, वीडियो में जाने 4700 करोड़ निवेश की तैयारी
हरियाणा के गुरुग्राम में बिजली वितरण व्यवस्था में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। पहली बार निजी क्षेत्र की एक बड़ी कंपनी ने शहर में बिजली सप्लाई का काम संभालने के लिए औपचारिक कदम बढ़ाया है। अडानी समूह की बिजली वितरण कंपनी ने गुरुग्राम में बिजली वितरण लाइसेंस हासिल करने के लिए हरियाणा विद्युत विनियामक आयोग (HERC) के सामने आवेदन दायर किया है।कंपनी ने यह याचिका विद्युत अधिनियम 2003 की धारा 15 के तहत दाखिल की है। यह धारा बिजली वितरण लाइसेंस प्राप्त करने की प्रक्रिया से जुड़ी है। कंपनी की ओर से प्रोसीजर फॉर ग्रांट ऑफ लाइसेंस के तहत आवेदन किया गया है। इस मामले में सुनवाई पूरी होने के बाद HERC ने अपना फैसला फिलहाल सुरक्षित रख लिया है।
अगर आयोग अडानी समूह के पक्ष में फैसला देता है तो गुरुग्राम की बिजली वितरण व्यवस्था में निजी क्षेत्र की बड़ी भागीदारी शुरू हो जाएगी। इससे शहर में बिजली सप्लाई, नेटवर्क विस्तार और उपभोक्ता सेवाओं में बदलाव आने की संभावना है।सुनवाई के दौरान एक अन्य कंपनी इलेवन की ओर से भी इस परियोजना में रुचि दिखाई गई। कंपनी ने गुरुग्राम और नूंह क्षेत्र में बिजली क्षेत्र के विकास के लिए करीब 4716.73 करोड़ रुपये के निवेश की योजना की जानकारी दी है। अब इस पूरे मामले में अंतिम निर्णय हरियाणा विद्युत विनियामक आयोग को लेना है।
गौरतलब है कि गुरुग्राम हरियाणा का प्रमुख कॉरपोरेट और औद्योगिक केंद्र है। यहां बड़ी संख्या में कंपनियां, आईटी संस्थान और व्यावसायिक प्रतिष्ठान मौजूद हैं। ऐसे में बिजली वितरण व्यवस्था को लेकर लगातार बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर और भरोसेमंद सप्लाई की मांग उठती रही है।अडानी समूह की प्रमुख बिजली वितरण और पारेषण कंपनी अदानी एनर्जी सॉल्यूशंस लिमिटेड है। कंपनी देश के कई क्षेत्रों में ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े काम कर रही है। वहीं, मुंबई में बिजली वितरण का संचालन उसकी सहायक कंपनी अदानी इलेक्ट्रिसिटी मुंबई लिमिटेड द्वारा किया जाता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, यदि गुरुग्राम में निजी कंपनी को बिजली वितरण का लाइसेंस मिलता है तो यह हरियाणा के ऊर्जा क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण बदलाव होगा। निजी भागीदारी से बिजली नेटवर्क के आधुनिकीकरण, स्मार्ट मीटरिंग, तकनीकी सुधार और उपभोक्ता सेवाओं में सुधार की उम्मीद की जा सकती है।हालांकि, अंतिम फैसला HERC के हाथ में है। आयोग सभी तकनीकी, आर्थिक और जनहित से जुड़े पहलुओं की समीक्षा करने के बाद ही निर्णय लेगा। अब नजर इस बात पर है कि क्या गुरुग्राम की बिजली व्यवस्था में निजी क्षेत्र को प्रवेश मिलेगा या मौजूदा व्यवस्था ही जारी रहेगी।

