दो साल के मासूम के फेफड़े में एक हफ्ते तक फंसा रहा रिमोट का बल्ब, एडवांस ब्रोंकोस्कोपी कर निकाला गया
एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है, जहां दो साल के मासूम बच्चे के फेफड़े में टीवी रिमोट का छोटा बल्ब करीब एक हफ्ते तक फंसा रहा। शुरुआत में परिवार को समझ ही नहीं आया कि बच्चे को आखिर क्या परेशानी है। लगातार खांसी, सांस लेने में दिक्कत और बेचैनी बढ़ने के बाद डॉक्टरों ने जांच की तो चौंकाने वाला खुलासा हुआ। बाद में एडवांस ब्रोंकोस्कोपी तकनीक की मदद से बच्चे के फेफड़े से बल्ब को सुरक्षित बाहर निकाला गया।
जानकारी के मुताबिक बच्चा पिछले कई दिनों से लगातार खांस रहा था और उसे सांस लेने में भी परेशानी हो रही थी। परिवार ने शुरुआत में इसे सामान्य सर्दी-खांसी समझा, लेकिन हालत में सुधार नहीं होने पर उसे अस्पताल ले जाया गया। डॉक्टरों ने जब एक्स-रे और अन्य जांच की तो पता चला कि बच्चे के फेफड़े में कोई बाहरी वस्तु फंसी हुई है।
जांच में सामने आया कि टीवी रिमोट में इस्तेमाल होने वाला छोटा बल्ब बच्चे के श्वसन मार्ग से होते हुए फेफड़े तक पहुंच गया था। डॉक्टरों के अनुसार यह स्थिति बेहद खतरनाक थी, क्योंकि यदि समय पर इलाज नहीं होता तो बच्चे की जान को गंभीर खतरा हो सकता था।
मामले की गंभीरता को देखते हुए डॉक्टरों की विशेषज्ञ टीम ने एडवांस ब्रोंकोस्कोपी प्रक्रिया करने का फैसला लिया। यह एक आधुनिक तकनीक है, जिसमें बिना बड़ा ऑपरेशन किए श्वसन नली के अंदर फंसी वस्तु को विशेष उपकरणों की मदद से निकाला जाता है। काफी सावधानी और मेहनत के बाद डॉक्टरों ने सफलतापूर्वक बल्ब को बाहर निकाल लिया।
डॉक्टरों का कहना है कि छोटे बच्चों में ऐसी घटनाएं आम होती जा रही हैं, क्योंकि वे खेल-खेल में छोटी चीजें मुंह में डाल लेते हैं। कई बार ये वस्तुएं सांस की नली में फंस जाती हैं, जिससे गंभीर स्थिति पैदा हो सकती है। समय पर सही जांच और इलाज न मिलने पर यह जानलेवा भी साबित हो सकता है।
विशेषज्ञों ने माता-पिता को सलाह दी है कि छोटे बच्चों को बैटरी, सिक्के, बल्ब, पिन, खिलौनों के छोटे पार्ट्स और अन्य छोटी वस्तुओं से दूर रखें। यदि बच्चा अचानक खांसने लगे, सांस लेने में दिक्कत हो या खाना निगलने में परेशानी महसूस करे तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।
अस्पताल प्रशासन ने बताया कि बच्चे की हालत अब पूरी तरह स्थिर है और वह तेजी से स्वस्थ हो रहा है। सफल उपचार के बाद परिवार ने डॉक्टरों का आभार जताया। इस घटना ने एक बार फिर बच्चों की सुरक्षा और अभिभावकों की सतर्कता की जरूरत को उजागर किया है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि आधुनिक चिकित्सा तकनीकों की मदद से अब ऐसे जटिल मामलों का इलाज संभव हो गया है, लेकिन सबसे जरूरी है समय रहते समस्या की पहचान और तुरंत उपचार। थोड़ी सी लापरवाही बच्चों के लिए बड़ा खतरा बन सकती है।

