24 घंटे में दो बार प्रधानमंत्री मोदी ने सोने की खरीद से बचने की अपील की, जनता से बचत पर जोर
Narendra Modi ने बीते 24 घंटे के भीतर देशवासियों से दो बार सोने की खरीदारी कम करने की अपील की है। पहले उन्होंने तेलंगाना में एक जनसभा को संबोधित करते हुए यह संदेश दिया, जिसके बाद एक अन्य कार्यक्रम में भी उन्होंने दोहराया कि देश के आर्थिक हित में लोगों को सोने जैसी गैर-उत्पादक संपत्तियों की बजाय बचत और निवेश के अन्य विकल्पों पर ध्यान देना चाहिए।
तेलंगाना की रैली में प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत को मजबूत आर्थिक आधार देने के लिए जनता की बचत का सही दिशा में उपयोग होना बेहद जरूरी है। उन्होंने संकेत दिया कि सोने की अधिक खरीद कई बार अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ाती है, जबकि वही पूंजी अगर विकास और उत्पादक क्षेत्रों में लगे तो देश तेजी से आगे बढ़ सकता है। इस दौरान उन्होंने लोगों से वित्तीय अनुशासन अपनाने और निवेश के विकल्पों को समझदारी से चुनने की सलाह दी।
इसके कुछ ही घंटों बाद एक अन्य सार्वजनिक कार्यक्रम में भी प्रधानमंत्री ने इसी बात को दोहराते हुए कहा कि भारत में सोना सांस्कृतिक रूप से महत्वपूर्ण है, लेकिन अत्यधिक खरीद कई बार व्यक्तिगत और राष्ट्रीय दोनों स्तर पर वित्तीय असंतुलन पैदा कर सकती है। उन्होंने कहा कि आज के समय में डिजिटल निवेश, बैंकिंग साधन और सरकारी योजनाएं अधिक सुरक्षित और लाभकारी विकल्प बनकर उभरी हैं।
प्रधानमंत्री की इस दोहराई गई अपील के बाद देश में आर्थिक नीति और उपभोक्ता व्यवहार को लेकर चर्चा तेज हो गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत दुनिया के सबसे बड़े सोना उपभोक्ता देशों में से एक है, और हर साल बड़ी मात्रा में सोने का आयात किया जाता है, जिससे विदेशी मुद्रा भंडार पर भी असर पड़ता है।
अर्थशास्त्रियों का कहना है कि अगर जनता का रुझान सोने की बजाय निवेश आधारित साधनों की ओर बढ़े, तो इसका सकारात्मक प्रभाव देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। हालांकि, कुछ विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि भारत में सोना केवल निवेश नहीं बल्कि सांस्कृतिक और सामाजिक परंपरा का हिस्सा भी है, इसलिए इसे पूरी तरह बदलना आसान नहीं होगा।
सरकारी सूत्रों के अनुसार, प्रधानमंत्री का यह संदेश वित्तीय जागरूकता अभियान का हिस्सा माना जा रहा है, जिसका उद्देश्य लोगों को कम जोखिम वाले और उत्पादक निवेश विकल्पों की ओर प्रेरित करना है। इसमें बैंकिंग बचत योजनाएं, डिजिटल निवेश प्लेटफॉर्म और सरकारी बॉन्ड जैसी योजनाओं को बढ़ावा देने की बात भी शामिल है।
विपक्षी दलों ने इस बयान पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं दी हैं। कुछ नेताओं का कहना है कि सरकार को पहले आर्थिक स्थिरता और रोजगार जैसे मुद्दों पर ध्यान देना चाहिए, जबकि कुछ ने इसे एक सकारात्मक संदेश बताते हुए वित्तीय अनुशासन की दिशा में कदम माना है।
फिलहाल प्रधानमंत्री के इस बयान ने देशभर में आर्थिक चर्चाओं को नया आयाम दे दिया है। सोशल मीडिया पर भी लोग इस मुद्दे पर अपनी राय व्यक्त कर रहे हैं। कई लोग इसे बचत बढ़ाने की दिशा में अच्छा कदम बता रहे हैं, जबकि कुछ इसे परंपरागत निवेश आदतों में हस्तक्षेप के रूप में देख रहे हैं।
कुल मिलाकर, प्रधानमंत्री की यह दोहरी अपील आने वाले दिनों में देश की आर्थिक नीति और उपभोक्ता व्यवहार पर चर्चा को और तेज कर सकती है।

