भारत की प्राचीन सांस्कृतिक धरोहर और आध्यात्मिक चेतना के प्रतीक सोमनाथ मंदिर को दुनिया भर श्रद्धालु और पर्यटक एक आस्था और भक्ति के केंद्र के रूप में जानते हैं। लेकिन आज यह पवित्र धाम केवल पूजा-अर्चना और दर्शन तक सीमित नहीं रह गया है। सोमनाथ मंदिर अब महिलाओं के सशक्तिकरण का प्रेरणादायी केंद्र भी बनकर उभरा है।
सोमनाथ मंदिर ट्रस्ट की ओर से अपनाए गए जनकेंद्रित और सामाजिक हित के दृष्टिकोण ने महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने का अवसर प्रदान किया है। मंदिर ट्रस्ट ने विभिन्न प्रशिक्षण और कौशल विकास कार्यक्रमों के माध्यम से महिलाओं को रोजगार और व्यवसाय के लिए तैयार किया है। इससे न केवल उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है, बल्कि सामाजिक और मानसिक सशक्तिकरण में भी वृद्धि हुई है।
महिला सशक्तिकरण को ध्यान में रखते हुए मंदिर परिसर में महिलाओं के लिए विशेष कार्यशालाएं, प्रशिक्षण सत्र और छोटे व्यवसाय को बढ़ावा देने वाले कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। इससे महिलाएं स्वयं की प्रतिभा को पहचान पाती हैं और समाज में अपनी भूमिका और योगदान को और प्रभावशाली ढंग से निभा पाती हैं।
सोमनाथ मंदिर का यह पहल यह दर्शाता है कि आध्यात्मिक स्थलों को केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं रखा जा सकता। यहां की सक्रिय सामाजिक नीति ने इसे महिलाओं के लिए प्रेरणा और मार्गदर्शन का केंद्र बना दिया है। मंदिर ट्रस्ट की यह सोच न केवल धार्मिक दृष्टि से प्रशंसनीय है, बल्कि सामाजिक और आर्थिक दृष्टि से भी सराहनीय पहल है।
इस तरह, सोमनाथ मंदिर न केवल श्रद्धा और भक्ति का प्रतीक बना हुआ है, बल्कि महिलाओं के आत्मनिर्भर बनने और समाज में अपनी जगह बनाने का मार्गदर्शक भी बन गया है। यह पहल स्पष्ट रूप से दर्शाती है कि धार्मिक स्थलों का सामाजिक योगदान और सशक्तिकरण की दिशा में उनकी भूमिका कितनी महत्वपूर्ण हो सकती है।

