सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण पर पीएम का बड़ा बयान, फुटेज में जानें कहा—भारत की शक्ति की प्रतीक है लहराती ध्वजा
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुजरात के ऐतिहासिक सोमनाथ मंदिर को लेकर 1000 साल पहले हुए हमले का जिक्र करते हुए एक बार फिर देश की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक शक्ति पर जोर दिया है। सोमनाथ मंदिर से करीब तीन किलोमीटर दूर सद्भावना ग्राउंड में आयोजित एक जनसभा को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि उस दौर में आक्रांताओं और आतताइयों को लगता था कि उन्होंने भारत की आस्था और आत्मा को पराजित कर दिया है, लेकिन आज भी सोमनाथ मंदिर पर लहराती ध्वजा यह बताती है कि हिंदुस्तान की असली शक्ति क्या है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि सोमनाथ मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि यह भारत की आत्मा, उसकी परंपरा और उसकी निरंतरता का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि “जो लोग उस समय यह सोच रहे थे कि मंदिर को नष्ट करके वे जीत गए हैं, वे भूल गए थे कि भारत की आस्था को कभी मिटाया नहीं जा सकता।” पीएम ने कहा कि सदियों की गुलामी और हमलों के बावजूद भारत की संस्कृति और श्रद्धा अक्षुण्ण रही है।
अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने बिना किसी का नाम लिए देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू पर भी परोक्ष रूप से निशाना साधा। उन्होंने कहा कि दुर्भाग्य से आज भी हमारे देश में ऐसी ताकतें मौजूद हैं, जिन्होंने आजादी के बाद भी सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण का विरोध किया था। पीएम मोदी ने कहा कि जब लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल ने सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण की शपथ ली थी, तब भी उन्हें रोकने की कोशिशें की गई थीं।
प्रधानमंत्री के इस बयान का सीधा संदर्भ वर्ष 1951 की उस ऐतिहासिक घटना से जोड़ा जा रहा है, जब सोमनाथ मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा समारोह में तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद के शामिल होने को लेकर विवाद खड़ा हुआ था। उस समय तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने राष्ट्रपति के इस कार्यक्रम में जाने पर आपत्ति जताई थी। हालांकि, डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने इन आपत्तियों के बावजूद प्राण प्रतिष्ठा समारोह में भाग लिया था, जिसे भारत के धार्मिक और सांस्कृतिक पुनर्जागरण का महत्वपूर्ण क्षण माना जाता है।
पीएम मोदी ने अपने भाषण में वर्तमान समय की राजनीति और सामाजिक हालात पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि आज भी हमें ऐसी विभाजनकारी ताकतों से सतर्क रहने की जरूरत है, जो समाज को बांटने और देश की एकता को कमजोर करने की कोशिश में लगी हुई हैं। उन्होंने कहा कि सोमनाथ मंदिर का इतिहास हमें यह सिखाता है कि एकता, आस्था और संकल्प के बल पर कोई भी शक्ति भारत को तोड़ नहीं सकती।
प्रधानमंत्री के इस बयान को आने वाले समय में राजनीतिक और वैचारिक बहस के तौर पर देखा जा रहा है। सोमनाथ मंदिर का उल्लेख करते हुए पीएम ने न केवल इतिहास को याद किया, बल्कि देश को एकजुट रहने और अपनी सांस्कृतिक जड़ों पर गर्व करने का संदेश भी दिया।

