गुजरात में CAG रिपोर्ट से हड़कंप, पुलिस कस्टडी में रखा हजारों किलो नशीला पदार्थ ‘गायब’ होने का दावा
गुजरात विधानसभा में हाल ही में पेश की गई नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की रिपोर्ट ने राज्य के गृह विभाग और पुलिस तंत्र की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। रिपोर्ट सामने आने के बाद सदन में हड़कंप मच गया और विपक्ष ने सरकार को घेरते हुए जवाबदेही तय करने की मांग की।
यह रिपोर्ट Comptroller and Auditor General of India द्वारा तैयार की गई है, जिसे विधानसभा पटल पर प्रस्तुत किया गया। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि पुलिस हिरासत में रखे गए जब्त किए गए हजारों किलोग्राम नशीले पदार्थों का कोई स्पष्ट हिसाब नहीं मिल रहा है।
रिपोर्ट के अनुसार, कई मामलों में जब्त किए गए मादक पदार्थों के रिकॉर्ड और वास्तविक भंडार में भारी अंतर पाया गया है। सबसे चौंकाने वाली बात यह सामने आई कि बड़ी मात्रा में जब्त ड्रग्स “गायब” पाए गए या उनका वजन रिकॉर्ड से मेल नहीं खा रहा था।
जब इस मुद्दे पर गृह विभाग से सवाल किया गया, तो दिए गए जवाब ने सभी को हैरान कर दिया। विभाग की ओर से कहा गया कि जब्त किए गए नशीले पदार्थ या तो “चूहों द्वारा नष्ट कर दिए गए” या फिर लंबे समय तक रखे जाने के कारण “नमी की वजह से उनका वजन कम हो गया।”
इस स्पष्टीकरण के सामने आने के बाद विधानसभा में तीखी बहस देखने को मिली। विपक्षी विधायकों ने इसे गंभीर लापरवाही करार देते हुए कहा कि यह मामला केवल प्रशासनिक चूक नहीं, बल्कि सिस्टम की निगरानी व्यवस्था पर बड़ा सवाल है।
CAG रिपोर्ट में यह भी संकेत दिया गया है कि जब्त किए गए मादक पदार्थों के भंडारण, सुरक्षा और रिकॉर्ड-कीपिंग में कई स्तरों पर खामियां हैं। कई थानों और गोदामों में सील किए गए माल की नियमित निगरानी और ऑडिटिंग की प्रक्रिया भी कमजोर पाई गई है।
विशेषज्ञों का कहना है कि जब्त मादक पदार्थों का इस तरह गायब होना या रिकॉर्ड से मेल न खाना गंभीर चिंता का विषय है, क्योंकि इससे कानूनी मामलों की जांच और न्यायिक प्रक्रिया पर भी असर पड़ सकता है।
सरकार की ओर से फिलहाल इस पूरे मामले की विस्तृत जांच के आदेश दिए जाने की बात कही जा रही है, जबकि प्रशासनिक स्तर पर जवाबदेही तय करने की प्रक्रिया भी शुरू होने की संभावना है।
निष्कर्षतः, CAG रिपोर्ट ने गुजरात के पुलिस और गृह विभाग की कार्यप्रणाली पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है, और अब यह मामला राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों स्तरों पर चर्चा का केंद्र बन गया है।

