कॉकरोच के दूध से लेकर अंडरवियर दफनाने तक... इन अजीब रिसर्च को मिला IG नोबेल पुरस्कार
विज्ञान की दुनिया में कुछ शोध ऐसे होते हैं, जो पहली नजर में बेहद अजीब और मजेदार लगते हैं, लेकिन उनके पीछे कोई न कोई वैज्ञानिक सोच छिपी होती है। ऐसे ही अनोखे और चौंकाने वाले शोधों को सम्मान देने वाला IG नोबेल पुरस्कार 2026 इस बार भी चर्चा में है। इस पुरस्कार का उद्देश्य ऐसे शोधों को सम्मानित करना है जो पहले लोगों को हंसाते हैं और फिर सोचने पर मजबूर करते हैं।
इस साल कई ऐसी रिसर्च को पुरस्कार मिला, जिनके विषय सुनकर लोग हैरान रह गए। इनमें कॉकरोच के दूध, किसिंग की वैज्ञानिक परिभाषा, सांपों के काटने के व्यवहार और मिट्टी की गुणवत्ता जांचने के लिए अंडरवियर दफनाने जैसी अनोखी स्टडी शामिल हैं।
कॉकरोच के दूध पर रिसर्च को मिला केमिस्ट्री अवॉर्ड
सबसे ज्यादा चर्चा कॉकरोच के दूध पर हुई रिसर्च की रही। वैज्ञानिकों ने Diploptera punctata नामक कॉकरोच प्रजाति के दूध जैसे पोषक पदार्थ का अध्ययन किया। शोध में पाया गया कि इसमें मौजूद प्रोटीन में गाय के दूध की तुलना में कई गुना ज्यादा ऊर्जा हो सकती है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि कॉकरोच का दूध इंसानों के लिए नया खाद्य विकल्प बन जाएगा, बल्कि यह अध्ययन प्रोटीन संरचना को समझने के लिए किया गया था।
1000 जोड़ी अंडरवियर जमीन में दबाए
IG नोबेल के सॉइल साइंस पुरस्कार में वैज्ञानिकों ने एक अनोखा प्रयोग किया। शोधकर्ताओं ने 25 से ज्यादा देशों में करीब 1000 जोड़ी अंडरवियर जमीन में दबाए और कुछ समय बाद उन्हें बाहर निकालकर मिट्टी की जैविक सक्रियता का अध्ययन किया। इस प्रयोग से यह पता लगाने की कोशिश की गई कि मिट्टी में मौजूद जीवाणु और जैविक गतिविधियां कितनी प्रभावी हैं।
किसिंग की वैज्ञानिक परिभाषा खोजी
बायोमैकेनिक्स कैटेगरी में वैज्ञानिकों को किसिंग यानी चुंबन की एक सटीक वैज्ञानिक परिभाषा तैयार करने के लिए सम्मान मिला। शोध में इंसानों के अलावा अन्य जीवों में होने वाले मुंह से जुड़े व्यवहारों का भी अध्ययन किया गया।
नाक साफ करने के तरीके पर भी रिसर्च
मेडिसिन कैटेगरी में जापानी शोधकर्ता डॉ. टोकुजी उन्नो के पुराने अध्ययन को सम्मान मिला, जिसमें नाक साफ करने यानी छींक या नाक से हवा निकालने की प्रक्रिया की एयरोडायनामिक्स का अध्ययन किया गया था।
सांप क्यों काटते हैं?
बायोलॉजी कैटेगरी में एक टीम ने जहरीले सांपों के काटने के व्यवहार का अध्ययन किया। शोधकर्ताओं ने यह समझने की कोशिश की कि किन परिस्थितियों में सांप इंसानों पर हमला करने की संभावना रखते हैं।
IG नोबेल पुरस्कारों की शुरुआत 1991 में हुई थी। यह पारंपरिक नोबेल पुरस्कारों की तरह नहीं है, बल्कि ऐसे शोधों को पहचान देता है जो अनोखे, मजेदार और सोच बदलने वाले हों। कई बार इन अजीब दिखने वाले अध्ययनों से आगे चलकर गंभीर वैज्ञानिक खोजों के रास्ते भी खुलते हैं।
इस साल के IG नोबेल विजेताओं ने एक बार फिर साबित किया कि विज्ञान केवल गंभीर प्रयोगशालाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि छोटी और अजीब लगने वाली जिज्ञासाएं भी नई खोजों की शुरुआत बन सकती हैं।

