राजस्थान के चिकित्सा क्षेत्र में फॉरेन मेडिकल ग्रेजुएट एग्जामिनेशन (एफएमजीई) के फर्जी प्रमाण पत्रों के जरिए ‘डॉक्टर’ बनने के संगठित खेल का स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (एसओजी) ने बड़ा खुलासा किया है। इस कार्रवाई में अब तक 90 संदिग्ध डॉक्टरों की पहचान की गई है, जिनमें से 20 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है।
जांच एजेंसियों के अनुसार, यह एक संगठित गिरोह है जो विदेश से मेडिकल डिग्री प्राप्त करने का दावा करने वाले लोगों को फर्जी एफएमजीई प्रमाण पत्र उपलब्ध कराता था। इन प्रमाण पत्रों के आधार पर आरोपी खुद को वैध डॉक्टर बताकर चिकित्सा सेवाएं दे रहे थे, जिससे मरीजों की जान के साथ गंभीर खिलवाड़ हो रहा था।
एसओजी की प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि इस गिरोह के तार कई राज्यों तक फैले हो सकते हैं। आरोपी पैसे लेकर फर्जी दस्तावेज तैयार कराते थे और उन्हें आधिकारिक रिकॉर्ड में भी दर्ज कराने की कोशिश करते थे। इससे पूरे सिस्टम की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े हो गए हैं।
अधिकारियों का कहना है कि गिरफ्तार किए गए आरोपियों से पूछताछ जारी है और इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की पहचान की जा रही है। साथ ही, जिन अस्पतालों या क्लीनिकों में ये फर्जी डॉक्टर कार्यरत थे, उनकी भी जांच की जा रही है।
स्वास्थ्य विभाग को भी इस मामले में सतर्क कर दिया गया है, ताकि ऐसे फर्जी डॉक्टरों की पहचान कर उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा सके। विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला चिकित्सा क्षेत्र की निगरानी व्यवस्था में सुधार की आवश्यकता को दर्शाता है।
एसओजी ने स्पष्ट किया है कि इस पूरे नेटवर्क को जड़ से खत्म करने के लिए व्यापक जांच अभियान चलाया जा रहा है और किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।
कुल मिलाकर, यह खुलासा चिकित्सा क्षेत्र में एक बड़ी चिंता का विषय बन गया है, जिसने मरीजों की सुरक्षा और स्वास्थ्य व्यवस्था की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

