ओल्ड गुरुग्राम मेट्रो के 3 स्टेशनों पर अटका काम, एंट्री-एग्जिट के लिए जमीन नहीं मिली; परियोजना के सामने बड़ी चुनौती
ओल्ड गुरुग्राम में प्रस्तावित मेट्रो परियोजना के निर्माण कार्य में एक बड़ी अड़चन सामने आई है। मेट्रो कॉरिडोर के तीन स्टेशनों के प्रवेश और निकास द्वार बनाने के लिए जरूरी जमीन अभी तक गुरुग्राम मेट्रो रेल लिमिटेड यानी GMRL को उपलब्ध नहीं हो सकी है। जमीन नहीं मिलने के कारण इन स्टेशनों के एंट्री और एग्जिट प्वाइंट तैयार करने की योजना प्रभावित हो रही है।
ओल्ड गुरुग्राम मेट्रो परियोजना को शहर के पुराने और घनी आबादी वाले इलाकों को बेहतर सार्वजनिक परिवहन से जोड़ने की महत्वपूर्ण योजना माना जा रहा है। परियोजना के तहत कई स्टेशन प्रस्तावित हैं, लेकिन तीन स्टेशनों के लिए जमीन की उपलब्धता का मुद्दा सामने आने से निर्माण प्रक्रिया को लेकर चुनौती बढ़ गई है।
इन तीन स्टेशनों पर जमीन की जरूरत
मेट्रो स्टेशन का मुख्य ढांचा तैयार करने के साथ-साथ यात्रियों के प्रवेश और निकास के लिए पर्याप्त जगह की जरूरत होती है। इसके लिए स्टेशन के आसपास जमीन उपलब्ध होना जरूरी है। मौजूदा स्थिति में तीन प्रस्तावित स्टेशनों के एंट्री-एग्जिट गेट के निर्माण के लिए आवश्यक जमीन GMRL को नहीं मिली है।
जमीन की उपलब्धता नहीं होने से इन हिस्सों में निर्माण की योजना को आगे बढ़ाना मुश्किल हो रहा है। मेट्रो परियोजना में स्टेशन की लोकेशन और उसके प्रवेश-निकास की स्थिति पहले से तय करनी होती है, क्योंकि इसका सीधा संबंध यात्रियों की आवाजाही, सड़क यातायात और सुरक्षा व्यवस्था से होता है।
पुराने गुरुग्राम में मेट्रो की जरूरत
ओल्ड गुरुग्राम लंबे समय से सार्वजनिक परिवहन और यातायात दबाव की समस्या से जूझ रहा है। शहर के पुराने इलाकों में सड़कें अपेक्षाकृत संकरी हैं और व्यस्त बाजारों तथा आवासीय क्षेत्रों के कारण यातायात का दबाव बना रहता है। ऐसे में मेट्रो परियोजना को भविष्य में यात्रियों के लिए महत्वपूर्ण विकल्प के रूप में देखा जा रहा है।
मेट्रो कनेक्टिविटी बढ़ने से सड़क पर निजी वाहनों का दबाव कम करने और शहर के अलग-अलग हिस्सों के बीच आवागमन आसान बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है। यही कारण है कि परियोजना के निर्माण से जुड़े हर चरण पर लोगों और स्थानीय प्रशासन की नजर है।
जमीन अधिग्रहण बनी चुनौती
मेट्रो स्टेशन के लिए जमीन उपलब्ध कराना बड़ी चुनौती होती है, खासकर घनी आबादी वाले शहरी क्षेत्रों में। कई स्थानों पर सरकारी जमीन सीमित होती है और निजी या अन्य संस्थाओं की जमीन का इस्तेमाल करना पड़ सकता है। ऐसे में जमीन हस्तांतरण, अधिग्रहण या अन्य प्रक्रियाओं में समय लग सकता है।
तीन स्टेशनों के प्रवेश और निकास द्वारों के लिए जमीन नहीं मिलने की समस्या भी इसी प्रक्रिया से जुड़ी बताई जा रही है। अब संबंधित एजेंसियों के सामने यह चुनौती है कि यात्रियों की सुविधा और परियोजना की तकनीकी जरूरतों को ध्यान में रखते हुए जल्द से जल्द जमीन की व्यवस्था की जाए।
डिजाइन और यातायात पर भी असर
एंट्री-एग्जिट गेट की जगह केवल स्टेशन की सुविधा का मामला नहीं है। इसका संबंध आसपास की सड़कों, फुटपाथ, ट्रैफिक मूवमेंट और पैदल यात्रियों की सुरक्षा से भी होता है। यदि निर्धारित स्थान पर जमीन उपलब्ध नहीं होती, तो डिजाइन में बदलाव की जरूरत पड़ सकती है।
GMRL को यह भी सुनिश्चित करना होगा कि वैकल्पिक व्यवस्था होने पर स्टेशन के प्रवेश और निकास यात्रियों के लिए सुविधाजनक रहें और सड़क यातायात पर अनावश्यक दबाव न पड़े।
फिलहाल तीन स्टेशनों के एंट्री-एग्जिट के लिए जमीन उपलब्ध न होना ओल्ड गुरुग्राम मेट्रो परियोजना के सामने एक महत्वपूर्ण चुनौती बनकर सामने आया है। अब निगाह इस बात पर है कि संबंधित विभाग और एजेंसियां इस जमीन संबंधी समस्या का समाधान कितनी जल्दी करती हैं। जमीन की व्यवस्था होने के बाद ही इन हिस्सों में स्टेशन के प्रवेश और निकास से जुड़े निर्माण कार्य को तेजी से आगे बढ़ाया जा सकेगा।
ओल्ड गुरुग्राम के लोगों के लिए यह परियोजना इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे शहर के पुराने हिस्सों को आधुनिक सार्वजनिक परिवहन नेटवर्क से जोड़ने की उम्मीद है। ऐसे में जमीन की यह अड़चन जल्द दूर होना परियोजना की प्रगति के लिए अहम माना जा रहा है।

