‘हमें AI से बने जंगल नहीं चाहिए’, सुप्रीम कोर्ट ने पेड़ काटने पर डीडीए को लगाई कड़ी फटकार
सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) को पेड़ काटने और हरियाली की अनियमित कटाई को लेकर कड़ी फटकार लगाई है। अदालत ने स्पष्ट किया कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) या डिजिटली तैयार जंगल प्राकृतिक हरियाली का विकल्प नहीं हो सकता। कोर्ट ने डीडीए से कहा कि शहर में पर्यावरण और पारिस्थितिकी को गंभीरता से लिया जाए और कोई भी कदम ऐसा न उठाया जाए जिससे वास्तविक पेड़ और जंगल प्रभावित हों।
सुप्रीम कोर्ट के जज ने कहा, “हमें AI से बने जंगल नहीं चाहिए। शहर में हरियाली, ताजगी और प्राकृतिक पर्यावरण के लिए पेड़ों की वास्तविक उपस्थिति जरूरी है। डिजिटल या कृत्रिम उपायों से पारिस्थितिकी संतुलन नहीं आएगा।” अदालत ने यह टिप्पणी डीडीए द्वारा बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई और पुनःरोपण में देरी के मामले में सुनवाई के दौरान की।
अदालत ने डीडीए को निर्देश दिया कि काटे गए पेड़ों की संख्या, उनकी किस्म और स्थान का विवरण प्रस्तुत किया जाए। इसके साथ ही कोर्ट ने कहा कि हर काटे गए पेड़ के लिए समान संख्या में और बड़े पेड़ लगाना अनिवार्य होगा और इसकी निगरानी ट्रैक रिकॉर्ड के जरिए हो।
विशेषज्ञों का कहना है कि दिल्ली में शहरीकरण और निर्माण गतिविधियों के चलते पेड़ों की कटाई लगातार बढ़ रही है, जिससे वायु गुणवत्ता, जल संरक्षण और तापमान संतुलन प्रभावित हो रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश से यह संदेश गया है कि प्राकृतिक हरियाली और पारिस्थितिकी की सुरक्षा सर्वोपरि है।
सुप्रीम कोर्ट ने डीडीए से यह भी पूछा कि क्या उन्होंने स्थानीय पर्यावरण नियमों और वन संरक्षण कानूनों का पालन किया है। अदालत ने कहा कि केवल डिजिटल या AI-आधारित समाधान अपनाने से पर्यावरण संरक्षण का काम नहीं चलेगा। प्राकृतिक पेड़ ही ऑक्सीजन, छाया और जीवन संरक्षण के लिए आवश्यक हैं।
डीडीए के अधिकारियों ने कोर्ट को बताया कि शहरी विकास और हरियाली के बीच संतुलन बनाने के प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन अदालत ने इसे अस्वीकार्य माना। सुप्रीम कोर्ट ने डीडीए को सख्त चेतावनी दी कि भविष्य में बिना अनुमति और पर्यावरणीय आकलन के कोई पेड़ नहीं काटा जाएगा।

