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दिल्ली नगर निगम एकीकरण के बाद बढ़ी राजनीतिक असंतोष की आवाज, दक्षिणी दिल्ली के पार्षदों ने जताई नाराजगी

दिल्ली नगर निगम एकीकरण के बाद बढ़ी राजनीतिक असंतोष की आवाज, दक्षिणी दिल्ली के पार्षदों ने जताई नाराजगी

राष्ट्रीय राजधानी के दिल्ली नगर निगम के तीनों जोन के एकीकरण के बाद राजनीतिक असंतोष की स्थिति सामने आई है। दक्षिणी दिल्ली के पार्षदों ने आरोप लगाया है कि उन्हें निर्णय प्रक्रिया और शीर्ष पदों में लगातार उपेक्षा का सामना करना पड़ रहा है।

पार्षदों का कहना है कि 2023 से 2026 के बीच नगर निगम के प्रमुख पदों पर अधिकतर नियुक्तियां उत्तरी दिल्ली के पार्षदों को दी गई हैं, जिससे दक्षिणी क्षेत्र के प्रतिनिधियों में असंतोष बढ़ा है।

इस मुद्दे को लेकर पार्षदों ने संगठनात्मक संतुलन और समान प्रतिनिधित्व की मांग उठाई है। उनका कहना है कि एकीकरण का उद्देश्य सभी क्षेत्रों को समान अवसर देना था, लेकिन व्यवहार में ऐसा होता नहीं दिख रहा है।

स्थानीय प्रतिनिधियों के अनुसार, इससे न सिर्फ राजनीतिक असंतुलन की भावना बढ़ी है, बल्कि क्षेत्रीय विकास परियोजनाओं पर भी असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।

वहीं प्रशासनिक सूत्रों का कहना है कि नियुक्तियां योग्यता और प्रक्रिया के आधार पर की जाती हैं, लेकिन पार्षदों का दावा है कि क्षेत्रीय संतुलन को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए।

मामला अब राजनीतिक चर्चा का विषय बन गया है और आने वाले समय में इस पर संगठनात्मक स्तर पर बातचीत की संभावना भी जताई जा रही है।

कुल मिलाकर, नगर निगम के एकीकरण के बाद उभरी यह असंतुष्टि दिल्ली की स्थानीय राजनीति में नए संतुलन और प्रतिनिधित्व को लेकर बहस को जन्म दे रही है।

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