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बजट सत्र के 10वें दिन लोकसभा में हंगामा, वीडियो में देखें रिजिजू हाथ जोड़कर बोले बजट पर चर्चा होने दें

बजट सत्र के 10वें दिन लोकसभा में हंगामा, वीडियो में देखें रिजिजू हाथ जोड़कर बोले बजट पर चर्चा होने दें, प्रश्नकाल की कार्यवाही ठप

बजट सत्र के 10वें दिन मंगलवार को लोकसभा में प्रश्नकाल की कार्यवाही प्रभावित रही। सुबह 11 बजे सदन शुरू होते ही विपक्ष ने जमकर हंगामा करना शुरू कर दिया, जिससे संसदीय प्रक्रिया बाधित हो गई। हंगामे को देखते हुए चेयर पर मौजूद पीसी मोहन ने महज एक मिनट बाद ही सदन को 12 बजे तक के लिए स्थगित कर दिया।

दोपहर 12 बजे सदन की कार्यवाही दोबारा शुरू हुई, लेकिन विपक्ष का हंगामा अभी भी जारी रहा। सांसद “वी वॉन्ट जस्टिस” के नारे लगाते रहे। इस दौरान सदन में माहौल इतना तनावपूर्ण हो गया कि संसदीय कार्यमंत्री किरेन रिजिजू को हस्तक्षेप करना पड़ा। उन्होंने हाथ जोड़कर विपक्षी सांसदों से अपील की कि बजट पर चर्चा होने दी जाए। रिजिजू ने कहा, “इस हंगामे के कारण हम सबका नुकसान हो रहा है। आप रोज आकर हंगामा करते हैं। ऐसे में काम नहीं हो पा रहा है।”

इसके बाद सदन को 2 बजे तक के लिए पुनः स्थगित कर दिया गया। बजट सत्र के दौरान यह लगातार दूसरा मौका है जब हंगामे के कारण प्रश्नकाल प्रभावित हुआ। विश्लेषकों का कहना है कि संसद में बजट सत्र के दौरान हंगामा आम बात है, लेकिन इस बार विपक्षी सांसदों ने विशेष रूप से सुरक्षा और वित्तीय मामलों को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया।

सदन के बाहर भी राजनीतिक हलचल बनी रही। इसी बीच, पूर्व बुक विवाद को लेकर राहुल गांधी ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि या तो पूर्व आर्मी चीफ जनरल एम एम नरवणे झूठ बोल रहे हैं, या फिर पेंगुइन। राहुल गांधी ने यह भी स्पष्ट किया कि उन्हें विश्वास है कि नरवणे झूठ नहीं बोलेंगे। उनका बयान इस बात की ओर इशारा करता है कि संसद के बाहर भी राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला जारी है।

विशेषज्ञों का कहना है कि बजट सत्र के दौरान हंगामे का सबसे बड़ा कारण सरकार और विपक्ष के बीच वित्तीय नीतियों और रक्षा मामलों पर असहमति है। विपक्ष लगातार सरकार से सवाल पूछ रहा है कि बजट में किन मुद्दों पर ध्यान दिया गया और किन्हें नजरअंदाज किया गया। वहीं, सरकार का कहना है कि संसद में कामकाज को बाधित किए बिना चर्चा होनी चाहिए, ताकि देश के वित्तीय और सामाजिक हित सुरक्षित रह सकें।

लोकसभा सचिवालय ने भी बताया कि हंगामे के कारण प्रश्नकाल में कई महत्वपूर्ण सवालों के जवाब नहीं दिए जा सके। इससे विधायी कार्यों और बजट पर चर्चा में देरी हो रही है। संसदीय विशेषज्ञों के अनुसार, ऐसे हंगामे लोकतंत्र का हिस्सा हैं, लेकिन यह आवश्यक है कि सांसद सदन की गरिमा और कार्यवाही को प्राथमिकता दें।

इस दिन की घटना ने एक बार फिर साबित कर दिया कि बजट सत्र में विपक्ष की सक्रियता और सरकार की प्रतिक्रिया के बीच संतुलन बनाना कितना चुनौतीपूर्ण है। सांसदों के हंगामे और स्थगन के कारण कार्यवाही प्रभावित हुई, लेकिन संसद के दोनों पक्षों ने यह भी माना कि बजट पर चर्चा जारी रहनी चाहिए, ताकि आर्थिक और सामाजिक नीतियों पर पारदर्शिता बनी रहे।

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