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डॉक्टर बनने और माता-पिता का घर बनाने के सपने मलबे में दफन, साकेत हादसे में तीन छात्रों की दर्दनाक मौत

डॉक्टर बनने और माता-पिता का घर बनाने के सपने मलबे में दफन, साकेत हादसे में तीन छात्रों की दर्दनाक मौत

दिल्ली के साकेत में हुए दर्दनाक इमारत हादसे ने तीन परिवारों के सपनों को हमेशा के लिए खत्म कर दिया। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे तीन होनहार छात्र—रवि, आलोक वर्मा और नलिन—इस हादसे का शिकार हो गए। मलबे में दबकर हुई उनकी मौत ने परिजनों को गहरे सदमे में डाल दिया है।

मृतकों में गोंडा का रहने वाला रवि डॉक्टर बनने का सपना देख रहा था। परिवार ने उसकी पढ़ाई के लिए कर्ज तक लिया था, ताकि बेटा पढ़-लिखकर एक सफल डॉक्टर बन सके और परिवार की आर्थिक स्थिति सुधार सके। लेकिन साकेत हादसे ने उसके सभी सपनों को चंद पलों में खत्म कर दिया।

वहीं बिहार के नवादा निवासी नलिन भी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहा था। परिवार के अनुसार, उसका सपना था कि नौकरी मिलने के बाद वह अपने माता-पिता के लिए एक पक्का घर बनवाए। नलिन की मौत के बाद परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। परिजन अब भी इस सदमे से उबर नहीं पाए हैं।

तीसरे छात्र आलोक वर्मा की मौत ने भी परिवार और दोस्तों को झकझोर कर रख दिया है। तीनों छात्र बेहतर भविष्य की उम्मीद लेकर दिल्ली आए थे, लेकिन एक हादसे ने उनकी जिंदगी और उनके परिवारों की उम्मीदों को खत्म कर दिया।

इमारत ढहने की घटना के बाद प्रशासन पर सवाल उठने लगे हैं। प्रारंभिक जांच में निर्माण और निगरानी से जुड़ी लापरवाही की आशंका जताई गई है। मामले को गंभीरता से लेते हुए नगर निगम (एमसीडी) ने कार्रवाई शुरू कर दी है।

एमसीडी ने लापरवाही बरतने के आरोप में एक जूनियर इंजीनियर और एक असिस्टेंट इंजीनियर को निलंबित कर दिया है। अधिकारियों का कहना है कि हादसे के कारणों की विस्तृत जांच की जा रही है और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

इस हादसे ने एक बार फिर राजधानी में भवन सुरक्षा, अवैध निर्माण और निगरानी व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। वहीं तीन परिवार अपने उन सपनों के टूटने का दर्द झेल रहे हैं, जिन्हें उनके बच्चों ने मेहनत और संघर्ष से संजोया था।

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