राजधानी की बदहाल सड़कें बन रहीं जानलेवा, मरम्मत के दावों के बावजूद हालात जस के तस
देश की राजधानी दिल्ली की सड़कें अब आम लोगों के लिए सुविधा नहीं, बल्कि खतरे का सबब बनती जा रही हैं। संगम विहार, गोविंदपुरी, मथुरा रोड और पटेल नगर समेत दिल्ली के कई इलाकों में सड़कों की बदहाली ने लोगों की जान जोखिम में डाल दी है। गड्ढों, टूटी सतह और उखड़ी हुई सड़कों के कारण आए दिन दुर्घटनाएं हो रही हैं, लेकिन इसके बावजूद मरम्मत को लेकर किए जा रहे दावे जमीन पर नाकाम साबित हो रहे हैं।
मध्य दिल्ली के पटेल नगर का दृश्य इस समस्या की गंभीरता को साफ तौर पर उजागर करता है। यहां की सड़कों पर जगह-जगह गहरे गड्ढे, टूटी हुई पटरियां और उखड़ी डामर की परतें लोगों के लिए परेशानी का कारण बनी हुई हैं। दोपहिया वाहन चालकों, साइकिल सवारों और पैदल चलने वालों के लिए यहां से गुजरना किसी जोखिम से कम नहीं है। बारिश के बाद हालात और भी बदतर हो जाते हैं, जब गड्ढों में पानी भर जाने से उनकी गहराई का अंदाजा तक नहीं लग पाता।
स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासन की ओर से कई बार सड़कों की मरम्मत के दावे किए गए, लेकिन काम या तो अधूरा रह गया या कुछ ही दिनों में सड़क फिर से टूट गई। संगम विहार और गोविंदपुरी जैसे घनी आबादी वाले इलाकों में तो स्थिति और भी गंभीर है, जहां संकरी और क्षतिग्रस्त सड़कों पर भारी ट्रैफिक का दबाव बना रहता है।
मथुरा रोड जैसी प्रमुख सड़क पर भी कई जगहों पर गड्ढे और असमतल सतह वाहन चालकों के लिए खतरा पैदा कर रही है। तेज रफ्तार वाहनों के अचानक ब्रेक लगाने से हादसों की आशंका बनी रहती है। वहीं पटेल नगर में स्कूली बच्चे, बुजुर्ग और महिलाएं रोजाना इन सड़कों से गुजरने को मजबूर हैं।
दुर्घटनाओं के आंकड़े भी चिंता बढ़ाने वाले हैं। स्थानीय निवासियों के अनुसार, बीते कुछ महीनों में गड्ढों की वजह से कई लोग गिरकर घायल हो चुके हैं। कई मामलों में वाहन क्षतिग्रस्त हुए हैं, लेकिन जिम्मेदारी तय नहीं हो पाई है। लोगों का आरोप है कि शिकायतों के बावजूद संबंधित विभाग केवल आश्वासन देकर मामला टाल देते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि सड़कों की खराब हालत का मुख्य कारण घटिया निर्माण सामग्री, समय पर रखरखाव की कमी और विभागों के बीच तालमेल का अभाव है। बार-बार पैचवर्क करने के बजाय स्थायी समाधान की जरूरत है, ताकि सड़कें लंबे समय तक सुरक्षित रह सकें।
नागरिकों की मांग है कि राजधानी की सड़कों को लेकर सिर्फ कागजी दावों के बजाय ठोस कार्रवाई की जाए। गड्ढों की समयबद्ध मरम्मत, गुणवत्ता की जांच और ठेकेदारों की जवाबदेही तय की जाए।
कुल मिलाकर, दिल्ली की बदहाल सड़कें राजधानी के बुनियादी ढांचे पर बड़ा सवाल खड़ा कर रही हैं। अगर समय रहते इन पर ध्यान नहीं दिया गया, तो यह स्थिति और गंभीर हो सकती है। आम लोगों की जान की कीमत पर विकास के दावों की पोल खुल रही है, और अब जरूरत है कि प्रशासन सिर्फ वादे नहीं, बल्कि जमीन पर बदलाव नजर आए।

