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डिजिटल दुनिया ने बच्चों का बचपन निगलना शुरू किया, विशेषज्ञों का चेतावनी

डिजिटल दुनिया ने बच्चों का बचपन निगलना शुरू किया, विशेषज्ञों का चेतावनी

मोबाइल स्क्रीन पर चलती रील्स, कोरियन ड्रामा जैसी विदेशी वेब सीरीज, गेम्स और ट्रेंडिंग गाने अब बच्चों की दुनिया का बड़ा हिस्सा बन गए हैं। खेल के मैदान, दोस्तों की बातें और परिवार का समय अब धीरे-धीरे डिजिटल कंटेंट में बदलता जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह सिर्फ बच्चों की पसंद नहीं, बल्कि योजनाबद्ध तरीके से उन्हें आभासी दुनिया का आदी बनाने की प्रक्रिया है।

मनोवैज्ञानिकों ने चेताया है कि लंबे समय तक मोबाइल और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर बिताया गया समय बच्चों की धैर्य क्षमता, सामाजिक कौशल और मानसिक विकास पर नकारात्मक प्रभाव डाल रहा है। बच्चे अब छोटी-छोटी चुनौतियों या वास्तविक गतिविधियों से जल्दी उब जाते हैं और उनकी ध्यान केंद्रित करने की क्षमता कमजोर होती जा रही है।

एक विशेषज्ञ ने कहा, “बच्चों के लिए मोबाइल और वेब सीरीज अब सिर्फ मनोरंजन का साधन नहीं हैं। यह उनके सोचने-समझने, सीखने और सामाजिक कौशल विकसित करने की क्षमता को प्रभावित कर रहा है। बच्चे अपनी असली दुनिया से कटकर आभासी दुनिया में अधिक समय बिताने लगे हैं।”

अध्ययन बताते हैं कि जिन बच्चों ने दिन में लंबा समय मोबाइल और गेम्स पर बिताया, उनमें नींद की समस्या, चिड़चिड़ापन, एकाग्रता की कमी और सामाजिक संपर्क में गिरावट देखी गई। माता-पिता भी अक्सर बच्चों की गतिविधियों पर नियंत्रण नहीं रख पाते, जिससे स्थिति और गंभीर हो रही है।

विशेषज्ञों का सुझाव है कि बच्चों के डिजिटल उपयोग को संतुलित और नियंत्रित करना बेहद जरूरी है। इसके लिए घर में नियमित समय पर स्क्रीन उपयोग, परिवार के साथ बातचीत और खेल-कूद के लिए समय निर्धारित किया जाना चाहिए। इससे बच्चों को आभासी और वास्तविक दुनिया के बीच संतुलन बनाए रखने में मदद मिलेगी।

स्कूल और शिक्षण संस्थानों में भी यह जरूरी है कि बच्चों को डिजिटल नैतिकता, समय प्रबंधन और मानसिक स्वास्थ्य की शिक्षा दी जाए। डिजिटल प्लेटफॉर्म पर बच्चों को सुरक्षित रखने के लिए सुरक्षा उपकरण और माता-पिता की निगरानी जरूरी है।

साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ बताते हैं कि ऑनलाइन गेम्स और वीडियो प्लेटफॉर्म आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और एल्गोरिदम के जरिए बच्चों की रुचि और आदतों को पहचानते हैं और उन्हें लगातार आकर्षित करते हैं। यह धीरे-धीरे बच्चों को लत और व्यवहार में बदलाव की ओर ले जाता है।

परिवार और समाज को मिलकर यह सुनिश्चित करना होगा कि बच्चों का बचपन डिजिटल दुनिया के चक्रव्यूह में न फँसे। बच्चों के लिए असली दुनिया, खेल-कूद, दोस्तों और परिवार के साथ समय बिताना अब पहले से अधिक महत्वपूर्ण हो गया है।

इस प्रकार, मोबाइल और डिजिटल कंटेंट की बढ़ती पकड़ ने बचपन और मानसिक विकास पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों की चेतावनी साफ है: बच्चों की डिजिटल आदतों पर नियंत्रण, समय प्रबंधन और उनके मानसिक स्वास्थ्य की सुरक्षा अब प्राथमिकता बन चुकी है।

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