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गुरुग्राम में एसएचओ की नियुक्ति अब जनता के फीडबैक के आधार पर, पुलिस आयुक्त ने तय की नई व्यवस्था

गुरुग्राम में एसएचओ की नियुक्ति अब जनता के फीडबैक के आधार पर, पुलिस आयुक्त ने तय की नई व्यवस्था

 गुरुग्राम के थानों में अब थाना प्रभारियों (एसएचओ) की नियुक्ति में जनता की राय को भी महत्व दिया जाएगा। पुलिस आयुक्त ने नई व्यवस्था की जानकारी देते हुए कहा है कि थानेदारों की कार्यप्रणाली का आकलन लोगों के फीडबैक के आधार पर किया जाएगा। पुलिस का उद्देश्य केवल अपराध होने के बाद कार्रवाई करना नहीं, बल्कि अपराध को रोकना और आम जनता का भरोसा मजबूत करना है।

पुलिस आयुक्त ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि थानों में आने वाले फरियादियों के साथ सम्मानजनक व्यवहार किया जाए। उन्होंने कहा कि पुलिस और जनता के बीच बेहतर संवाद और विश्वास कायम करना पुलिस व्यवस्था की सबसे बड़ी प्राथमिकता है। किसी भी व्यक्ति को शिकायत दर्ज कराने या मदद लेने के दौरान परेशानी का सामना न करना पड़े, इसके लिए अधिकारियों को विशेष ध्यान देने को कहा गया है।

नई व्यवस्था के तहत एसएचओ की तैनाती से पहले उनके कामकाज, जनता के साथ व्यवहार और क्षेत्र में पुलिसिंग की स्थिति का मूल्यांकन किया जाएगा। इसमें स्थानीय लोगों की प्रतिक्रिया और फीडबैक को भी शामिल किया जाएगा। पुलिस अधिकारियों का मानना है कि इससे थानों की कार्यप्रणाली में सुधार आएगा और जवाबदेही बढ़ेगी।पुलिस आयुक्त ने कहा कि आधुनिक पुलिसिंग में केवल अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई करना ही पर्याप्त नहीं है। पुलिस को ऐसी व्यवस्था विकसित करनी होगी, जिससे अपराध होने से पहले ही उसे रोका जा सके। इसके लिए बीट पुलिसिंग, स्थानीय लोगों से संपर्क और संवेदनशील क्षेत्रों की निगरानी पर जोर दिया जाएगा।

उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि थानों में आने वाले प्रत्येक व्यक्ति की शिकायत को गंभीरता से सुना जाए। फरियादियों के साथ अभद्र व्यवहार या लापरवाही को किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा। पुलिसकर्मियों को आम लोगों के प्रति संवेदनशील रवैया अपनाने की सलाह दी गई है।गुरुग्राम जैसे तेजी से विकसित हो रहे शहर में कानून व्यवस्था बनाए रखना पुलिस के लिए बड़ी चुनौती है। बढ़ती आबादी, नए आवासीय क्षेत्रों और औद्योगिक गतिविधियों के बीच अपराध नियंत्रण के लिए प्रभावी पुलिसिंग की जरूरत है। ऐसे में पुलिस विभाग जनता की भागीदारी को बढ़ाने पर जोर दे रहा है।

अधिकारियों का कहना है कि जनता का भरोसा मजबूत होने से अपराध नियंत्रण में भी मदद मिलेगी। लोग यदि बिना डर के पुलिस तक अपनी बात पहुंचा पाएंगे तो अपराध से जुड़ी सूचनाएं समय पर मिल सकेंगी और कार्रवाई अधिक प्रभावी होगी।पुलिस आयुक्त की इस पहल को थानों की कार्यशैली में सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। अब आने वाले समय में एसएचओ की नियुक्ति और उनके प्रदर्शन के मूल्यांकन में जनता की प्रतिक्रिया की भूमिका अहम हो सकती है।

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