जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा पर टिप्पणी मामले में सौरभ दास का बयान, बोले- पोस्ट नहीं हटाई, सार्वजनिक जानकारी के आधार पर कही थी बात
जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा पर की गई टिप्पणियों को लेकर विवाद के बीच सौरभ दास ने अपना पक्ष रखा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उन्होंने अपने सोशल मीडिया पोस्ट या टिप्पणियों को डिलीट नहीं किया है। उनका कहना है कि उन्होंने जो भी बातें लिखीं, वे सूचना के अधिकार (RTI) के तहत प्राप्त जानकारी और सार्वजनिक रूप से उपलब्ध तथ्यों के आधार पर कही थीं।
सौरभ दास ने कहा कि उनकी टिप्पणियां किसी व्यक्तिगत आरोप या दुर्भावना से प्रेरित नहीं थीं। उन्होंने दावा किया कि उनके द्वारा साझा की गई जानकारी सार्वजनिक रिकॉर्ड और आरटीआई के माध्यम से प्राप्त दस्तावेजों पर आधारित थी। इसलिए उन्हें अपने बयान वापस लेने या पोस्ट हटाने की आवश्यकता नहीं लगी।
उन्होंने यह भी कहा कि सार्वजनिक पदों पर आसीन व्यक्तियों से जुड़े मामलों पर तथ्यात्मक आधार पर सवाल उठाना लोकतांत्रिक व्यवस्था का हिस्सा है। उनका कहना था कि यदि कोई जानकारी सार्वजनिक रिकॉर्ड में उपलब्ध है, तो उस पर टिप्पणी करना अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के दायरे में आता है।
हालांकि, इस मामले को लेकर कानूनी और न्यायिक स्तर पर विवाद बना हुआ है। जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा से जुड़ी टिप्पणियों को लेकर न्यायालय में कार्यवाही चल रही है और मामले के विभिन्न पहलुओं पर सुनवाई की जा रही है।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि न्यायपालिका से जुड़े मामलों में सार्वजनिक टिप्पणी करते समय तथ्यों की सत्यता और न्यायालय की गरिमा का विशेष ध्यान रखना आवश्यक होता है। वहीं, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और न्यायपालिका की प्रतिष्ठा के बीच संतुलन बनाए रखना भी महत्वपूर्ण माना जाता है।
फिलहाल सौरभ दास अपने बयान पर कायम हैं। उन्होंने दोहराया कि उनकी टिप्पणियां आरटीआई से प्राप्त जानकारी और सार्वजनिक रूप से उपलब्ध दस्तावेजों पर आधारित थीं तथा उन्होंने संबंधित पोस्ट को हटाया नहीं है। मामले में आगे की स्थिति अदालत की कार्यवाही और न्यायिक निर्णय पर निर्भर करेगी।

