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सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट टेंडर मामले में सत्येंद्र जैन को मिली जमानत, कोर्ट ने कहा- इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य नहीं मिले

सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट टेंडर मामले में सत्येंद्र जैन को मिली जमानत, कोर्ट ने कहा- इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य नहीं मिले

दिल्ली जल बोर्ड (DJB) के सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) टेंडर से जुड़े कथित घोटाले के मामले में आम आदमी पार्टी (AAP) नेता सत्येंद्र जैन को अदालत से राहत मिली है। कोर्ट ने उनकी जमानत याचिका स्वीकार कर ली है। अदालत ने सुनवाई के दौरान कहा कि सत्येंद्र जैन के खिलाफ कोई इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य उपलब्ध नहीं हैं और जांच एजेंसी की ओर से पेश किए गए सबूत इतने मजबूत नहीं हैं कि आरोपी को जमानत का लाभ देने से रोका जा सके।

मामला दिल्ली जल बोर्ड के सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट टेंडर से जुड़ा हुआ है। जांच एजेंसी ने इस मामले में कथित अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के आरोप लगाए थे। आरोप था कि टेंडर प्रक्रिया में नियमों का उल्लंघन हुआ और कुछ लोगों को अनुचित लाभ पहुंचाया गया। इस मामले में सत्येंद्र जैन की भूमिका को लेकर जांच की जा रही थी।सुनवाई के दौरान अदालत ने मामले से जुड़े दस्तावेजों और जांच एजेंसी की ओर से पेश किए गए साक्ष्यों पर गौर किया। कोर्ट ने कहा कि उपलब्ध सामग्री के आधार पर फिलहाल ऐसा कोई ठोस इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य सामने नहीं आया है, जो आरोपी के खिलाफ सीधे तौर पर आरोपों को साबित करता हो।

अदालत ने यह भी टिप्पणी की कि जांच एजेंसी की ओर से पेश किए गए सबूत इतने पर्याप्त नहीं हैं कि आरोपी को जमानत देने से इनकार किया जाए। इसी आधार पर कोर्ट ने सत्येंद्र जैन की बेल अर्जी को मंजूर कर लिया।जमानत मिलने के बाद सत्येंद्र जैन के समर्थकों में खुशी का माहौल है। वहीं, विपक्षी दलों ने मामले को लेकर अपनी प्रतिक्रिया दी है। राजनीतिक गलियारों में भी इस फैसले को लेकर चर्चा तेज हो गई है।

गौरतलब है कि सत्येंद्र जैन दिल्ली सरकार में मंत्री रह चुके हैं और आम आदमी पार्टी के प्रमुख नेताओं में शामिल हैं। इससे पहले भी वह कई कानूनी मामलों को लेकर चर्चा में रहे हैं। जांच एजेंसियां अलग-अलग मामलों में उनकी भूमिका की जांच करती रही हैं।दिल्ली जल बोर्ड से जुड़े इस मामले में जांच एजेंसी आगे की कार्रवाई जारी रख सकती है। अदालत के आदेश के बाद अब मामले की अगली कानूनी प्रक्रिया पर नजर रहेगी।कोर्ट के फैसले से सत्येंद्र जैन को फिलहाल बड़ी राहत मिली है। हालांकि, मामले की जांच और उससे जुड़ी अन्य कानूनी प्रक्रियाएं आगे भी जारी रहेंगी। अदालत ने अपने आदेश में उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर जमानत देने का निर्णय लिया है।

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