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सत्य निकेतन हादसा: अर्पित की आंखों से अब दो लोग देख सकेंगे दुनिया, पिता ने बेटे के कॉर्निया किए दान

सत्य निकेतन हादसा: अर्पित की आंखों से अब दो लोग देख सकेंगे दुनिया, पिता ने बेटे के कॉर्निया किए दान

दिल्ली के सत्य निकेतन में हुए दर्दनाक हादसे ने कई परिवारों को गहरे सदमे में डाल दिया। इस हादसे में जान गंवाने वाले अर्पित अब इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन उनकी आंखों से दो लोगों की जिंदगी में रोशनी लौट सकेगी। अपने इकलौते बेटे को खोने के बाद भी अर्पित के पिता ने जिस हिम्मत का परिचय दिया, वह मानवता की एक मिसाल बन गया है। उन्होंने बेटे के दोनों कॉर्निया दान करने का फैसला लिया, ताकि किसी जरूरतमंद को नई रोशनी मिल सके।

इकलौते बेटे को खोने का गम, फिर भी लिया बड़ा फैसला

अर्पित के जाने का दुख उनके परिवार के लिए बेहद गहरा है। माता-पिता के लिए अपने इकलौते बेटे को खोना किसी असहनीय पीड़ा से कम नहीं है। हादसे के बाद परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। इसके बावजूद अर्पित के पिता ने ऐसा फैसला लिया, जिससे उनके बेटे की मौजूदगी किसी और की जिंदगी में रोशनी बनकर बनी रहेगी।परिवार ने अर्पित के दोनों कॉर्निया दान करने की सहमति दी। इस फैसले के बाद अब दो जरूरतमंद लोगों को उनकी आंखों की रोशनी मिलने की उम्मीद है।

मौत के बाद भी किसी की जिंदगी रोशन होगी

अंगदान और नेत्रदान को मानवता के सबसे बड़े कार्यों में माना जाता है। किसी अपने को खोने के बाद उसके अं को दान करने का फैसला लेना परिवार के लिए भावनात्मक रूप से बेहद कठिन होता है। अर्पित के पिता ने इसी मुश्किल घड़ी में नेत्रदान का निर्णय लेकर समाज के सामने एक उदाहरण पेश किया है।अर्पित अब भले ही अपने परिवार के बीच नहीं हैं, लेकिन उनकी आंखों से दो लोग दुनिया को देख सकेंगे। इस तरहउनके जाने के बाद भी उनकी आंखें किसी और के जीवन में उम्मीद और रोशनी लेकर आएंगी।

सत्य निकेतन हादसे ने मचाई थी तबाही

दिल्ली के सत्य निकेतन में इमारत गिरने की घटना में कई लोगों की जान चली गई। हादसे के बाद प्रशासन और संबंधित एजेंसियां भी सक्रिय हुई हैं। जर्जर और कमजोर इमारतों की सुरक्षा को लेकर जांच और कार्रवाई का सिलसिला शुरू किया गया है।इस हादसे ने जहां कई परिवारों को अपनों से हमेशा के लिए दूर कर दिया, वहीं अर्पित के परिवार के इस फैसले ने दुख की इस घड़ी में मानवता की एक अलग तस्वीर पेश की है।

पिता के फैसले को मिल रही सराहना

अपने इकलौते बेटे की मौत के बाद भी उसके अंगदान का फैसला लेना आसान नहीं होता। अर्पित के पिता ने इस कठिन समय में जिस तरह नेत्रदान के लिए सहमति दी, वह दूसरे लोगों के लिए भी प्रेरणा बन सकता है।अर्पित की आंखें अब दो लोगों को नई जिंदगी का एहसास करा सकती हैं। उनके पिता का यह फैसला बताता है कि कभी-कभी किसी अपने को खोने का सबसे बड़ा दर्द भी किसी दूसरे के जीवन में उम्मीद की वजह बन सकता है। अर्पित इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन उनकी आंखों की रोशनी अब दो जिंदगियों को उजाला देगी।

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