Samachar Nama
×

PUC Certificate: क्या प्रदूषण प्रमाणपत्र का मतलब है कि वाहन बिल्कुल प्रदूषण नहीं फैला रहा? जानिए पूरा सच

PUC Certificate: क्या प्रदूषण प्रमाणपत्र का मतलब है कि वाहन बिल्कुल प्रदूषण नहीं फैला रहा? जानिए पूरा सच

सड़कों पर चलने वाले पुराने वाहनों के लिए प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र यानी PUC Certificate रखना अनिवार्य है। केंद्रीय मोटर वाहन नियमों के तहत वाहन के पहली बार रजिस्ट्रेशन के एक साल बाद वैध PUC प्रमाणपत्र जरूरी होता है। सामान्य तौर पर इसकी वैधता छह महीने होती है, जबकि कुछ BS-IV और BS-VI वाहनों के लिए यह अवधि 12 महीने तक हो सकती है।लेकिन यहां एक बड़ा सवाल उठता है कि क्या वैध PUC सर्टिफिकेट का मतलब यह है कि वाहन बिल्कुल प्रदूषण नहीं फैला रहा? इसका जवाब है- नहीं। PUC प्रमाणपत्र यह साबित नहीं करता कि वाहन से शून्य प्रदूषण हो रहा है। यह केवल यह बताता है कि जांच के समय वाहन के उत्सर्जन ने निर्धारित मानकों को पूरा किया था।

PUC टेस्ट में क्या होता है?

PUC सेंटर पर वाहन के उत्सर्जन की जांच निर्धारित प्रक्रिया और उपकरणों के जरिए की जाती है। टेस्ट के आधार पर यह देखा जाता है कि वाहन से निकलने वाले प्रदूषक तय सीमा के भीतर हैं या नहीं। अगर वाहन निर्धारित मानकों के अनुरूप पाया जाता है तो PUC प्रमाणपत्र जारी किया जाता है।यानी यह प्रमाणपत्र उस समय की गई जांच का परिणाम है, वाहन के अगले छह या 12 महीनों तक समान स्तर पर प्रदूषण करने की गारंटी नहीं।

समय के साथ बदल सकता है वाहन का उत्सर्जन

वाहन का इंजन, एयर फिल्टर, स्पार्क प्लग, इंजेक्टर, एग्जॉस्ट सिस्टम और अन्य हिस्से समय के साथ खराब या गंदे हो सकते हैं। खराब मेंटेनेंस, ईंधन की गुणवत्ता और वाहन की स्थिति का असर भी उत्सर्जन पर पड़ सकता है।दिल्ली परिवहन विभाग ने भी विधानसभा को दी गई जानकारी में कहा है कि वैध PUC अवधि के दौरान दिखाई देने वाला धुआं वाहन की मेंटेनेंस समस्या या ईंधन में मिलावट जैसी वजहों से हो सकता है।

PUC सिस्टम को पारदर्शी बनाने के प्रयास

सरकार ने PUC प्रमाणपत्रों को VAHAN डेटाबेस से जोड़ने की व्यवस्था की है। इसके अलावा PUC केंद्रों पर टेस्टिंग प्रक्रिया की निगरानी और रिकॉर्डिंग से जुड़ी व्यवस्थाएं भी लागू की जा रही हैं। आधिकारिक PUC पोर्टल पर टेस्ट के दौरान वाहन नंबर, जांच केंद्र और एग्जॉस्ट में टेस्टिंग प्रोब की रिकॉर्डिंग जैसी आवश्यकताओं का उल्लेख है।

CAG की 2026 की एक रिपोर्ट में भी PUC डेटा को VAHAN से जोड़ने और टेस्टिंग सेंटरों की निगरानी से जुड़ी चुनौतियों का उल्लेख किया गया है।इसलिए PUC को वाहन के प्रदूषण स्तर की समय-समय पर होने वाली जांच के प्रमाण के तौर पर समझना चाहिए, न कि पूरे साल वाहन के प्रदूषण-मुक्त रहने की गारंटी के रूप में। वाहन की नियमित सर्विसिंग और सही रखरखाव भी उत्सर्जन कम रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

Share this story

Tags