केंद्र सरकार द्वारा सुरक्षा कारणों को ध्यान में रखते हुए 1 अप्रैल से चीन निर्मित CCTV कैमरों की बिक्री पर रोक लगाए जाने के बाद अब दिल्ली सरकार भी इस दिशा में सक्रिय हो गई है। राजधानी में पहले से लगे चीनी CCTV कैमरों को बदलने की प्रक्रिया शुरू करने की तैयारी की जा रही है।
दिल्ली सरकार के PWD मंत्री प्रवेश साहिब सिंह ने बुधवार को जानकारी देते हुए बताया कि सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने के उद्देश्य से पूरे दिल्ली में लगे करीब डेढ़ लाख चीनी CCTV कैमरों को हटाने की योजना पर काम किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यह कदम साइबर सुरक्षा और राष्ट्रीय सुरक्षा मानकों को ध्यान में रखते हुए उठाया जा रहा है।
मंत्री के अनुसार, इन कैमरों को चरणबद्ध तरीके से हटाकर उनकी जगह अधिक सुरक्षित और भरोसेमंद तकनीक वाले उपकरण लगाए जाएंगे। सरकार का मानना है कि निगरानी तंत्र में इस्तेमाल होने वाले उपकरणों की गुणवत्ता और उनके डेटा सुरक्षा मानकों का मजबूत होना बेहद जरूरी है, ताकि किसी भी तरह की संभावित सुरक्षा चुनौती से बचा जा सके।
हालांकि, इस फैसले को लेकर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आने लगी हैं। आम आदमी पार्टी ने इस कदम की आलोचना करते हुए इसे राजनीतिक उद्देश्य से प्रेरित बताया है। पार्टी का कहना है कि इस तरह के फैसलों से पहले व्यापक समीक्षा और वैकल्पिक व्यवस्था सुनिश्चित की जानी चाहिए।
वहीं, सरकार का तर्क है कि यह कदम पूरी तरह सुरक्षा हितों को ध्यान में रखते हुए उठाया जा रहा है और इसका उद्देश्य राजधानी की निगरानी व्यवस्था को अधिक सुरक्षित और आधुनिक बनाना है।
विशेषज्ञों का मानना है कि CCTV नेटवर्क किसी भी शहर की सुरक्षा व्यवस्था का अहम हिस्सा होता है, ऐसे में इसके तकनीकी मानकों और डेटा सुरक्षा पर विशेष ध्यान देना आवश्यक है।
कुल मिलाकर, दिल्ली में चीनी CCTV कैमरों को हटाने की यह योजना सुरक्षा और तकनीकी सुधार की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है, हालांकि इस पर राजनीतिक बहस भी तेज हो गई है।

