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किस आधार पर जमानतदारों से इतनी पूछताछ? सौरभ दास और रांका की हिरासत बढ़ने पर CJP
 

किस आधार पर जमानतदारों से इतनी पूछताछ? सौरभ दास और रांका की हिरासत बढ़ने पर CJP

कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेताओं सौरव दास और आशुतोष रांका की न्यायिक हिरासत दो दिन बढ़ाए जाने के बाद जमानतदारों की जांच को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। CJP ने सवाल उठाया है कि जमानतदारों से इतनी पूछताछ क्यों की गई और उनके दस्तावेजों पर आपत्ति के आधार क्या थे। दूसरी ओर, अदालत के आदेश में जमानतदारों की पहचान और जानकारी से जुड़ी विसंगतियों का उल्लेख किया गया है।

जमानतदारों के दस्तावेजों में क्या गड़बड़ी बताई गई?

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, 19 अक्टूबर के आदेश में दो जमानतदारों को लेकर आपत्तियां दर्ज की गईं।

  • पहले जमानतदार पर आपत्ति: जमानत बॉन्ड और पहचान पत्र पर लगी तस्वीरों में अंतर बताया गया। आदेश के मुताबिक, अतिरिक्त पहचान पत्र मांगे जाने पर वह उसे पेश नहीं कर सका।

  • दूसरे जमानतदार से पूछताछ: वह उस व्यक्ति के माता-पिता के नाम और पते जैसी बुनियादी जानकारी नहीं बता पाया, जिसके लिए वह जमानतदार बना था।

इन्हीं कारणों से जमानतदारों की स्वीकार्यता पर सवाल उठाए गए।

CJP ने क्या आरोप लगाए?

CJP की विधि प्रमुख रत्ना सिंह और दोनों नेताओं के वकील ने आरोप लगाया कि जमानत की प्रक्रिया में बार-बार देरी की गई और जमानतदारों को अस्पष्ट कारणों से खारिज किया गया। उनका कहना है कि इससे दोनों नेताओं की रिहाई में बाधा आई। वकील पुष्प शर्मा ने आदेश को उच्च न्यायालय में चुनौती देने की बात कही है।

पुलिस और अदालत का क्या कहना है?

पुलिस ने दलील दी कि दोनों नेताओं ने पहले शांति बनाए रखने के लिए बंधपत्र दिया था, लेकिन इसके बाद भी प्रतिबंधित प्रदर्शन स्थल जंतर-मंतर पर पहुंचकर नियमों का उल्लंघन किया। पुलिस ने उनकी रिहाई से शांति-व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका भी जताई। अदालत के आदेश में इन दलीलों और रिकॉर्ड पर मौजूद सामग्री का उल्लेख किया गया है।

अब आगे क्या होगा?

दोनों नेताओं की न्यायिक हिरासत 21 अक्टूबर 2026 तक बढ़ाई गई है। अगली सुनवाई में उनके लिखित जवाब, जमानतदारों के दस्तावेज और पुलिस की दलीलें अहम होंगी। CJP की ओर से उच्च न्यायालय जाने की बात भी कही गई है।

फिलहाल विवाद के दो पहलू हैं—CJP जमानतदारों की जांच और सुनवाई में देरी पर सवाल उठा रही है, जबकि अदालत के आदेश में पहचान संबंधी विसंगतियों और शांति-व्यवस्था को लेकर आशंकाओं का उल्लेख है। आगे की कानूनी कार्रवाई से ही स्पष्ट होगा कि जमानत की प्रक्रिया किस दिशा में बढ़ती है।

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