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दिल्ली में सी-डॉट परिसर में अवैध निर्माण पर एनजीटी का संज्ञान, 10 दिन में रिपोर्ट तलब

दिल्ली में सी-डॉट परिसर में अवैध निर्माण पर एनजीटी का संज्ञान, 10 दिन में रिपोर्ट तलब

नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने दिल्ली में सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ टेलीमैटिक्स (सी-डॉट) परिसर में अवैध निर्माण के मामले का संज्ञान लिया है। यह कार्रवाई ग्रेड-तीन और चार निर्माण नियमों के बावजूद निर्माण कार्यों के चलते हुई पर्यावरणीय चिंता के कारण की गई है।

शिकायत के अनुसार, सी-डॉट परिसर में 80 शौचालयों का निर्माण किया जा रहा है, जिसके दौरान निर्माण कार्य से धूल और प्रदूषण का फैलाव हुआ। शिकायतकर्ता ने एनजीटी को बताया कि इस धूल और प्रदूषण के कारण उन्हें और आसपास के लोगों को स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ा। इसके अलावा, शिकायत में मुआवजे की मांग भी की गई है।

एनजीटी ने मामले की गंभीरता को देखते हुए वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) को निर्देश दिया है कि वे 10 दिन के भीतर स्थल निरीक्षण करें और निर्माण कार्य से होने वाले प्रदूषण की रिपोर्ट दाखिल करें। आयोग को यह भी सुनिश्चित करना है कि परिसर में निर्माण कार्य सभी पर्यावरणीय नियमों और सुरक्षा मानकों के अनुरूप हो रहा है।

विशेषज्ञों का कहना है कि सरकारी परिसरों में अवैध निर्माण न केवल पर्यावरण को प्रभावित करता है, बल्कि आसपास के निवासियों और कार्यालय कर्मचारियों की स्वास्थ्य सुरक्षा पर गंभीर असर डालता है। एनजीटी की इस कार्रवाई से यह संदेश गया है कि सरकारी संस्थान भी पर्यावरण नियमों के ऊपर नहीं हैं और किसी भी प्रकार का उल्लंघन बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

सीएक्यूएम के अधिकारियों ने बताया कि उन्होंने तुरंत निरीक्षण टीम गठित कर दिया है। निरीक्षण के दौरान निर्माण कार्य की अनुमति, धूल नियंत्रण उपाय और पर्यावरण सुरक्षा प्रोटोकॉल की जांच की जाएगी। इसके साथ ही आयोग एनजीटी को विस्तृत रिपोर्ट सौंपेगा, जिसमें सुधारात्मक उपायों और संभावित मुआवजे का विवरण भी शामिल होगा।

शिकायतकर्ता का कहना है कि निर्माण कार्य के कारण सांस लेने में कठिनाई, एलर्जी और अन्य स्वास्थ्य समस्याएं उत्पन्न हुई हैं। उन्होंने एनजीटी से आग्रह किया है कि उचित मुआवजे के साथ-साथ निर्माण कार्य को सुरक्षित और पर्यावरण-अनुकूल बनाने के लिए तुरंत कदम उठाए जाएं।

एनजीटी ने यह स्पष्ट किया है कि प्रदूषण नियंत्रण और नागरिक स्वास्थ्य सर्वोपरि है। इस दिशा में कार्रवाई न सिर्फ दिल्ली, बल्कि पूरे देश में सरकारी और निजी निर्माण परियोजनाओं के लिए एक सतर्कता का संदेश है।

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